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सवाल का महत्व है लेकिन उससे भी अधिक महत्व है इस बात का कि सही सवाल पूछा जाए: शिक्षा के संदर्भ में

2013 में मैंने प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करके बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और फिर 2016 में आईआई टी दिल्ली, इन पड़ाव का प्रभाव, मेरे परिचितों पर पड़ा और परिणामतः कई लोगों ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए मुझसे सलाह ली

  • कुछ लोगों ने कहा कि गर्मी कि छुट्टी मे मैं उनके बच्चों को ट्यूशन दे दूँ
  • कुछ ने उन कोचिंग/स्कूल का नाम पूछा जहां मैंने पढ़ा
  • कुछ ने उन किताबों का नाम पूछा जिन्हे मैंने पढ़ा 
  • बहुत कम या कहूँ कि इक्का दुक्का लोगों ने पूछा कि "आप पढ़ते कैसे हैं, क्योंकि वही किताबें और उन्ही कोचिंग या उन्ही स्कूल का सहारा तो अन्य लोग भी लेते हैं फिर परिणाम अलग क्यों!"

 

जिन्होने नहीं पूछा तो उनको मैंने बिना पूछे ही "तरीके" पर सुनने का आग्रह किया लेकिन अधिकतर ने नजरंदाज करके सीधे किताब, कोचिंग या स्कूल के नाम पर फोकस किया क्योंकि उनके मन में था कि "पढ़ तो उनका बच्चा लेगा ही बस किताब/कोचिंग का नाम पता चल जाएगा"

बदलाव कुछ खास नहीं रहे, क्योंकि मेरी बताई किताब तो कई बार खरीद ली गयी, मेरी बताई गयी कोचिंग मे प्रवेश भी ले लिया गया लेकिन कितना कुछ सीखा जा सका, इस पर कोई बात न हुयी, बात हुयी तो सीधे रिज़ल्ट आने पर|

 

किताब और कोचिंग के जितना ही और कई मामलों में इनसे ज्यादा महत्वपूर्ण है "तरीका या एप्रोच" 

 

इसीलिए जब भी किसी से पढ़ाई पर बात करें तो उस चर्चा में तरीके को समुचित स्थान दें |

 

शुभकामनाएँ

-लवकुश