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नौवीं ऑनलाइन साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा 03-05-2026

बीते रविवार (03-05-2026) हम सबके सामूहिक प्रयास और वरिष्ठजनों के प्रोत्साहन से नौवीं साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा का ऑनलाइन आयोजन सफल रहा, जिसमें निम्नलिखित पुस्तकों/रचनाओं/विषयों पर सार्थक चर्चा हुयी:

कबिरा सोई पीर है (उपन्यास) - प्रतिभा कटियार (लोकभारती प्रकाशन, लेखिका अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की कार्यकर्ता हैं)

स्मारिका  - उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट 

अब पहुंची हो तुम (कविता संग्रह) - महेश चन्द्र पुनेठा 

मुसाफिर कैफे  - दिव्य प्रकाश दुबे

खाकी में इंसान  - अशोक कुमार साथ में लोकेश ओहरी 

नचिकेता - महेश चन्द्र पुनेठा 

  • प्रयास करें की घर में कोई एक घंटे का अंतराल निर्धारित करें जब घर के बड़े कोई साहित्यिक पुस्तक लेकर उसका अध्ययन करें, इससे नियमित हमारी समझ को विस्तार मिलेगा और घर में माहौल आएगा पढने लिखने का, हो सकता है कि बड़ों को देख बच्चे भी पुस्तकें लेकर बैठें, बच्चों की रंग बिरंगी आकर्षक पुस्तकें डिस्प्ले रैक में रखें ताकि वो बच्चों को अपनी और आकर्षित कर सकें|
  • किसी साहित्यिक रचना की मार्मिकता, बारीकी, पठनीयता और सामाजिक सरोकार पाठक के मन को बाँध सकती हैं कि वह पूरी पुस्तक पढ़ जाये 
  • जिन्होंने जातिगत भेदभाव कभी झेला नहीं उन्हें जातिगत भेदभाव को उजागर करने वाली रचनाएँ और बातें अतिश्योक्ति लग सकती हैं |
  • 03 मई को विश्व पत्रकारिता दिवस होता है, यइसका उद्देश्य प्रेस की आजादी के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मीडिया की स्वतंत्रता पर हमलों का विरोध करना और पत्रकारिता के दौरान जान गंवाने वाले पत्रकारों को श्रद्धांजलि देना है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित यह दिवस, लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा में निष्पक्ष पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित करता है
  • स्व० उमेश डोभाल (पत्रकार) और गिरीश चंद्र तिवारी (गिर्दा) हैं जैसे अमिट शख्शियतों और उनके योगदान पर बात हुयी |
  • जम्हूर आलम उअर नैनीताल की होली पर भी बात हुयी 
  • हिंदी भाषा में बात रखना ही आपको इसमें और पढने को प्रेरित करेगा, फिर लिखने को और इससे ही भाषा समृद्ध होती ही और हममें निपुणता आती है| 
  • उक्त परिचर्चा में निम्नलिखित पुस्तकसाथी शामिल रहे:

    आदरणीय महेश चन्द्र पुनेठा सर, हिमांशु जोशी जी, आकाश कश्यप, कृष्णा जायसवाल, गुंजन त्यागी मैम, प्रिया शर्मा, अमितेन्द्र सिंह, सौम्या मैम, कपिल देव, अंशुल पाण्डेय, सौम्या वर्मा, प्रिया, लक्ष्मण जोशी, उर्मिला, सिद्धार्थ यादव, विजय कुमार, ममता, गायत्री जायसवाल, अरुण मौर्या और लवकुश|

  • पुस्तक परिचर्चा मे शामिल सभी पुस्तक साथियों (Bookmates) ने पुस्तक परिचर्चा मे शामिल होकर/अभिव्यक्ति/सराहना/भागीदारी के माध्यम से इस पहल को पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने में, मानवीय मूल्यों के पोषण में, अपनी बात को बेहिचक रखने में महत्वपूर्ण माना एवं एक दूसरे के प्रति आभार व्यक्त किया ताकि इस जरूरी कार्य की नियमितता बनी रहे एवं समाज मे एक सकारात्मक बदलाव में अपना विनम्र योगदान सुनिश्चित किया जा सके |

    धन्यवाद ज्ञापन के साथ परिचर्चा के संचालक लवकुश कुमार ने परिचर्चा को अगली परिचर्चा तक के लिए विराम दिया |

    इस आशा के साथ कि यह रिपोर्ट पाठकों को पुस्तक परिचर्चा को समझने और उसमे शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी |

    अगली परिचर्चा 10 मई, रविवार रात 09 बजे होगी, शामिल होकर पढ़ने-लिखने की संस्कृति पर काम करने में अपना योगदान सुनिश्चित करें और पुस्तक परिचर्चा से साहित्यिक लाभ लेते हुये अपने दिन की सार्थकता में एक और आयाम जोड़ें|

      धन्यवाद 

    -लवकुश कुमार