
पुस्तक- अंतस : ज़रा ठहरिए
लेखक- लवकुश कुमार
प्रकाशक- Notion Press
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में ठहरना लगभग भूल चुके हैं हम। ऐसे समय में "अंतस" एक ऐसी पुस्तक बनकर सामने आती है, जो न सिर्फ हमें रुकने के लिए कहती है साथ ही भीतर झांकने का साहस भी देती है।
इस पुस्तक को पढ़ने से पहले मुझे लगा था कि यह एक सामान्य सेल्फ हेल्प किताब जैसी होगी लेकिन जैसे-जैसे मैं इसके पन्नों में आगे बढ़ता गया। यह अनुभव कहीं अधिक व्यक्तिगत और गहरा होता चला गया। लेखक ने रोज़मर्रा की साधारण लगने वाली घटनाओं के माध्यम से जीवन के बड़े सवालों को बेहद सहजता से उठाया है।
लेखक की सबसे बड़ी ताकत उनकी संवेदनशीलता है। वह किताबों और लेखकों के महत्व को जिस आत्मीयता से प्रस्तुत करते हैं। वह कहीं न कहीं सीधे दिल तक पहुंचती है। पुस्तक में विभिन्न किताबों, फिल्मों और विचारों का ज़िक्र न केवल पाठक की जिज्ञासा बढ़ाता है बल्कि उसकी सोच के दायरे को भी विस्तृत करता है।
इस पुस्तक की एक और खासियत इसके छोटे-छोटे प्रसंग और उद्धरण हैं। जो कम शब्दों में गहरी बात कह जाते हैं। एक जगह लेखक एक चिड़िया का उदाहरण देते हैं जो जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए अपनी चोंच में पानी भरकर लाती है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़े बदलाव का हिस्सा बन सकती हैं। सिर्फ दर्शक बनकर रहने से बेहतर है कुछ करना।
संक्षेप में -
पुस्तक से कुछ उद्धरण -
" वह हर इंसान सम्मान के योग्य है जो अपना कार्य
ज़िम्मेदारी और ईमानदारी से कर रहा है भले ही आपको उससे कोई
व्यक्तिगत फायदा न हो, इसकी परिणति ऐसे होती है कि सम्मान की
चाह में अन्य लोग भी ज़िम्मेदारी से अपना काम करने को प्रेरित होते हैं"
"अपने संसाधनो / धन / समय का एक हिस्सा परोपकार मे जरूर
लगाएँ, आपकी आय कम हो या ज्यादा उसमे दूसरों के लिए कुछ
कर पाने की गुंजाइश जरूर रखें, ये न हो कि पूरा वक़्त तथाकथित
अपनों के लिए चीजें और सुरक्षा खरीदने मे या उसकी तैयारी में लगा
दिया, एक-एक दिन को सार्थक करें, जिसमे व्यायाम, अध्ययन, और
जरूरतमन्द की मदद जरूर से शामिल हों, आप कितना भी वंचित
महसूस कर लें, ऐसे लोग भी हैं जो आपसे भी ज्यादा वंचित हैं, उनके
लिए कुछ काम करके, एक जरूरी उदाहरण बनें।"
"जब जीवन मे कोई उद्देश्य न दिखे तब एक काम किया जा सकता है,
है, जरूरतमन्द लोगों की निस्वार्थ सेवा, उनमे सबसे ऊपर जिस बात को
मैं रखता हूँ, वह है लोगों को शिक्षित करना, उन्हे लोगों की तकलीफों
को लेकर संवेदित करना, उनकी समझ पर काम करना, उन्हे मेहनत,
उत्कृष्टता और हुनर के लिए तैयार करना, उन तक बड़े बड़े लोगों की
जीवनियाँ और प्रेरक प्रसंग पहुंचाना, उन तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाना"
"सबसे बड़ा पाप अन्याय को देखकर भी चुप रहना है।"
- महात्मा गांधी
"जो इंसान अपनी समझ और आकांक्षाएं साझा नहीं करना चाहता वो
समाज से अपनी सहूलियत की दिशा की अपेक्षा कैसे कर सकता है! बिना
किसी पूर्वाग्रह के और बिना इस बात की चिंता किए कि लोग मेरे बारे में
क्या सोचेंगे बेधड़क होकर अपनी बात रखिए और दूसरों को भी हिम्मत
दीजिए, जो कुछ महसूस कर रहें उसे सामने व्यक्त करने का |
आपका एक लाइन का इनपुट भी मायने रखता है।"
#opinion_matters
"एक उपाय बाहर के प्रभाव को न्यूट्रल करने का, वह है अपने घर मे
अपनी क्षमता में एक पुस्तकालय का निर्माण करना जिसमे देश दुनिया
का उत्कृष्ट साहित्य हो और हो जीवनियाँ दुनिया के महान लोगों की,
जिन्होने आजादी और गरिमा के लिए जीवन भर संघर्ष किया, और
दुनिया को एक बेहतर जगह बनाया, अपने जीवन मे उत्कृष्ट कार्य करके
आनंद प्राप्त किया, ईमानदारी, बहादुरी और करुणा का जीवन जिया,
ताकि बच्चों को जीवन के लिए सही आदर्श मिल सकें |"
उक्त पुस्तक निम्नलिखित लिंक से क्रय की जा सकती है :- https://notionpress.com/in/read/antas
विशाल चन्द @reading_owl.3
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विशाल चन्द जी समाजशास्त्र के शोधार्थी, पाठक और संवेदनशील शिक्षार्थी हैं। नवीन ज्ञान अर्जन और सतत सीखना आपके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। पुस्तकों का पठन और संग्रहण आपको विशेष प्रिय है।
आपके भीतर एक घुमक्कड़ चेतना भी सक्रिय है, जो आपको नए लोगों, स्थानों और अनुभवों से जोड़ती रहती है। बागवानी आपके लिए प्रकृति से संवाद का माध्यम है।
आप समाज को अपने स्वतंत्र दृष्टिकोण से देखने और विभिन्न समूहों के साथ मिलकर सामाजिक दायित्वों के निर्वहन को निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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"अंतस - जरा ठहरिए"
लेखक - लवकुश कुमार
प्रकाशक - नोशन (Notion) प्रेस चेन्नई
"अंतस - जरा ठहरिए" लवकुश कुमार जी द्वारा लिखी गई पहली साहित्यिक पुस्तक है,जो हॉल ही में प्रकाशित हुई है।
यह सरल शब्दों में जीवन मूल्यों की तरफ़ पाठक का ध्यान खींचती है। जो बहुत ही संवेदनशील तरीके से लिखी गई है।
जो किसी क्षेत्र या किसी एक विषय के बारे में भले ही आपको पूर्ण ज्ञान न दे सकें। लेकिन आम जीवन में छोटी छोटी चीजों का क्या महत्व है, उस ओर आपको जरा देर खींचकर रोक देती है।
बहुत सामान्य से विषय है,जहां सूक्ष्म चीजों को लेकर उन्होंने अपना लेखन किया है। एक तरह से यह पुस्तक मन में उठते तूफान को शांत कर देती है, खुद के लिए अपराधबोध, समाज के लिए ईर्ष्या,खुद के ही आगे बढ़ने की लालसा को ठहर कर सोचने को कहती है। उनका मुख्य चिंतन समाज के लिए है जो यह कहते हैं कि अपनी एक जिम्मेदारी समाज के लिए भी रखो।अपनी जिंदगी में इतने परेशान रहने की जरूरत नहीं है, किसी जरूरत मंद इंसान की मदद करो वह किसी भी तरह से की जा सकती है। दूसरों की मदद करने से बड़ा कोई सुख नहीं है।
आज जब जिंदगी बहुत तेजी से भाग रही है, आए दिन तरह-तरह की घटनाएं हमें सुनाई देती है, जब मानव सभ्यता को एक अलग दिशा में प्रवाहित किया जा रहा है।मनुष्य के लालच और भोग विलास को ही जीवन का उद्देश्य मान लिया गया है, ऐसे में लवकुश जी बहुत से उदाहरण देकर जीवन का उद्देश्य समझाते है।
जब मनुष्य, मनुष्य होने के नाते कुछ न कर पाने के अपराधबोध से खुद को दबाएं हुए है, ऐसे में आज के वातावरण का सूक्ष्म अवलोकन के लिए मानो कोई जगह ही नहीं रह गई है और परिणामतः हम कोई कार्य इसलिए नहीं कर रहे कि उससे हमें आनंद की प्राप्ति हो।
जीवन के मूलभूत पहलुओं में यह किताब एक मनुष्य को स्पष्टता देती है कि अभी कुछ भी नहीं छूटा, एक तसल्ली देती है कि अभी कुछ भी नहीं बिगड़ा,अगर किसी कारण से पढ़ाई छूट गई या कुछ परिस्थिति बदल गई तो उसका विकल्प फिर से शुरू करना है न कि आत्मघाती कदम उठा लेना|
जीवन की बारीकियों को समझाती हुई यह पुस्तक जीवन की खूबसूरती से पाठक का परिचय कराती है। वह स्पष्ट रूप से कहते हैं कि यह पुस्तक उनके द्वारा दुनिया और स्वयं को देखे और समझे जाने का प्रतिफल है।
यह पुस्तक पाठक के दिमाग में बहुत प्रभाव डालती है। मुझे स्वयं इसे पढ़ते हुए लग रहा था कि हां मुझे भी जरूरत थी इस तरह की पुस्तक की, जो आपको प्रेरित करें, लिखने को ,पढ़ने को अपने विचार खुल कर रखने को,अपनी असहमति दर्ज करने को और सामने वाले की बातों का सम्मान करने के लिए।
- शीतल
शीतल जी, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के एक दूरस्थ पहाड़ी गांव भट्टयूडा से आती हैं। आपने अपना परास्नातक, भूगोल विषय में लक्ष्मण सिंह मेहर कैंपस पिथौरागढ़ से किया है। आप सामाजिक खांचों में फिट नहीं होना चाहती, इसे इस परिप्रेक्ष्य मे देखें कि आप हर वह रिवाज नकारना चाहती हैं जो आपको एक लड़की होने का हवाला देकर कम आंकते हो।
किताबें संवेदनशील ,सामाजिक ,निर्भय और वैज्ञानिक चेतना देती हैं, अतः किताबें पढ़ना, नया जानते रहकर अपनी समझ को विस्तार देते रहना आपकी आदत मे शुमार है। आपको फिल्में देखना पसंद है, और घूमना भी। भूगोल आपको अपनी ओर खींचती है साथ ही नए और रचनात्मक लोगों के साथ बात करने और उनके बारे में जानने को उत्सुक रहती हैं |
उक्त पुस्तक निम्नलिखित लिंक से क्रय की जा सकती है :- https://notionpress.com/in/read/antas
फीडबैक / प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, के लिए यहाँ क्लिक करें |
यह मेरी पहली साहित्यिक पुस्तक है, जो मेरे कुछ पुराने और कुछ नए लेखों का संकलन है और साथ ही इसमें शामिल हैं अतिथि लेखकों की कुछ बेहतरीन रचनाएं |
यह पुस्तक समर्पित है "उन सभी साहसी लोगों को जो सच्चाई का साथ देने और उसे अभिव्यक्त करने की जरूरत को सुविधा से ऊपर रखते हैं |"

लिंक - https://notionpress.com/in/read/antas
“यह एक ऐसी किताब है जो आपका ध्यान उन बातों की ओर ले जाएगी, जो न केवल आपकी दुविधाओं और भ्रम को दूर करेंगी, बल्कि आपको जीवन, दुनिया और स्वयं के बारे में ऐसी स्पष्टता देंगी कि आप एक साहसी और आत्मविश्वासी इंसान बनकर जीवन को बेहतर ढंग से जी सकें।”
मेरा मानना है कि यह पुस्तक विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी जो निर्णय लेने, जीवन को समझने और दुनिया व उसकी व्यवस्थाओं को समझने में दुविधा या कठिनाइयों का सामना करते हैं।
भारत के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालयों में प्राप्त अनुभवों के साथ-साथ एक पाठक, चिंतक और ब्लॉगर के रूप में लेखक का अनुभव और ज्ञान भी पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
इस पुस्तक में कई विषयों पर समझ को विस्तार देने एवं जरुरी मुद्दों की तरफ ध्यान देते हेतु निम्नलिखित विषयों पर लेख शामिल हैं :
पढ़ने लिखने की संस्कृति पर
आवश्यकता
लेखक के बारे में
स्वीकारोक्ति
प्रस्तावना
भूमिका
पावती (स्वीकृति)
साहित्य और मानविकी अत्यंत जरूरी
मुद्दे और विषय जिन्हे संबोधित करने का प्रयास किया
1.
कार्य को सम्मान और जरूरी श्रेय
2.
कार्य को व्यवहार से ऊपर रखना
3.
आपसी सम्मान की नींव
4.
अभिव्यक्ति के लिए माहौल
5.
शरीर नहीं, कार्य से हो आंकलन और उससे भी पहले मानव
होने की गरिमा
6.
हमारे आदर्श और युवा
7.
क्या हमारे अंदर कोई तानाशाह है ?
8.
ईमानदारी की रक्षा
9.
लिखना, अपना पक्ष रखना, सही बात को आगे बढ़ाना जरूरी
क्यों: एक सोंच
10.
लिखने के फायदे- एक संक्षिप्त समीक्षा
11.
साहित्य जरूरी क्यों?
12.
दोहराव - एक लघुकथा
13.
सड़क हादसों पर एक लघुकथा - थ्रिल
14.
उपदेशक, जरूरत जाँचें
15.
गलतियाँ और तिरस्कार
16.
नवाचार का माहौल
17.
क्या देर हो गयी ? जीवन अर्थहीन लग रहा ?
18.
जीवन में कुछ अच्छा करना चाहते हैं? तरीका ?
19.
मधुरिमा, चेतन और करप्सन - एक लघुकथा
20.
पड़ोसी की दिक्कत आपकी दिक्कत बन सकती है
21.
मेरे सपनों की दुनिया
22.
अपनी बात या अनुभव लिखने/कहने मे संकोच?
23.
कितनों को प्रोत्साहित किया आपने ? और आपको ?
24.
प्रशंसा एक टॉनिक
25.
कठिन परिस्थितियों में चीजों की परीक्षा
26.
युवाओं द्वारा आत्महत्या ! एक पड़ताल, एक नजरिया
27.
सम्यक जीवन और प्राथमिकताएं -1
28.
सम्यक जीवन और प्राथमिकताएं -2
29.
सम्यक जीवन और प्राथमिकताएं -3
30.
सम्यक जीवन और प्राथमिकताएं -4
31.
अध्ययन को लेकर रुझान, बात अंदर की
32.
दूसरों की परवाह या खुद को आराम
33.
मानव व्यवहार और समाज
34.
जिम्मेदारी और जवाबदेही का भाव
35.
Hatsapp स्टेटस
36.
दो टूक और वन लाइनर
37.
नाम में क्या रखा है ! वाकई ?
38.
जिंदगी को अर्थ और एडवेंचर देना चाहते हो- एक विकल्प
39.
ठसक वाला जीवन एक समाज सेवा
40.
सच बोलने वाले लोग कम क्यों दिखते हैं ?
41.
सुकून के पल और सृजन
42.
सियाटिका- एक लघुकथा
43.
पिता – एक लघुकथा
44.
केवल आप ही सही !
45.
केवल मीठा सुनने की आदत है ?
46.
अपनी बात समझना
47.
सड़क दुर्घटना
48.
वादा
49.
कुछ अन्य सवाल
50.
पढ़ने की संस्कृति का अभाव
51.
पुरस्कार न लेने का निर्णय
52.
अंतस से सवाल करती कविताएं
53.
बाल विज्ञान खोजशाला
कुछ बेहतरीन पुस्तकें
कुछ बेहतरीन फिल्में
कुछ बेहतरीन कविताएं
उद्धरण - डॉ विजय अग्रवाल
उद्धरण - शिक्षा के सवाल
उक्तियाँ - आचार्य प्रशांत
स्पष्टता और समझ के लिए उक्तियाँ
पुस्तक की शुरुआत होती है - कवि भवानी प्रसाद मिश्र एवं - कवि महेश चन्द्र पुनेठा की कविताओं से जो क्रमशः इस प्रकार हैं
कुछ लिख के सो,
कुछ पढ़ के सो,
तू जिस जगह जागा सवेरे,
उस जगह से बढ़ के सो
- कवि भवानी प्रसाद मिश्र
मैं न लिख पाऊँ एक अच्छी कविता
दुनिया एक इंच इधर से उधर नहीं होगी
गर मैं न जी पाऊँ कविता
दुनिया में अंधेरा कुछ और बढ़ जाएगा
इसलिए मेरी पहली कोशिश है
कि मरने न पाए मेरे भीतर की कविता।
- कवि महेश चन्द्र पुनेठा
देखते हैं
भूमिका
"चाहत है तो उस चाहत को पूरा करने के लिए माहौल
बनाने पर भी काम करना होगा|"
हम सब चाहते हैं ऐसा समाज जिसमे
लोग अपना काम बहुत अच्छे से कर रहे हों
लोग अपने काम से काम रखते हों और एक दूसरे को
परेशान न करते हों
सड़कों पर लोग नियम से चल रहे हों, दुर्घटनाएँ कम से
कम हों
सभी अपना काम ईमानदारी से कर रहे हों
लोग अपने वादों पर खरे उतरते हों
लोग किसी को उसकी जाति, समुदाय, वंश, शारीरिक
सुंदरता से न पहचान उसे उसके काम से पहचानते हों
अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर सबको मिलता
हो
लोग नयी जगह भी सुरक्षित महसूस करते हों
लोग एक दूसरे से सलीके से और प्रेम के साथ पेश आयें
लोग अपने अधिकार के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें
लोग अपनी स्वतन्त्रता का दुरुपयोग न करें
लोग कमजोर पर हसने के बजाय उनके साथ करुणा का
बर्ताव करें
तकलीफ मे फंसे इंसान को यथासंभव मदद मिले नाकि
लोग खड़े होकर बस वीडियो बनाएँ
काम करने वाले को काम का श्रेय दें नकि चापलूसी करने
वाले और बातें बनाने वालों को
सबको उनके हिस्से का श्रेय और प्रतिष्ठा मिले
हिंसा का स्थान न हो, लोगों को आजादी हो "न" कहने की
स्वतन्त्रता हो जबरदस्ती नहीं, सबसे उनका पक्ष या
अनुभव सुना जाए
साझा हितों के कार्यक्रमों मे सभी साझेदारों से उनकी राय
जानी जाये और उसे उचित स्थान भी दिया जाए
शिक्षकों का उचित सम्मान हो
लोग एक दूसरे का आंकलन सतही बातों पर न करें
अपराध कम से कम हों
मजबूत द्वारा कमजोर का शोषण न हो
भेदभाव न हो, परिवारवाद न हो
ज्यादा से ज्यादा लोगों में अपनी गलती स्वीकार करने का
और ज़िम्मेदारी लेने का साहस हो
इत्यादि
आइए देखते हैं कि क्या दिक्कतें हैं कि कई जगहों पर ऐसा
नहीं हो पा रहा और ठहरकर अवलोकन करें कि कहीं हम
स्वयं ही तो अंजाने मे गलत उदाहरण पेश कर उस माहौल को
बिगाड़ रहे हैं, जिसमे जरूरी मानवीय मूल्य फलते फूलते हैं |
स्वयं मे झाँकने का प्रयास, प्रयास विरोधाभासों को
पकड़ने का, अगर दिक्कत को हल करना है तो पहले उसे
समझिए|
भूमिका से एक अनुमान लग सकता है पुस्तक की सामग्री का, अब देखते हैं कुछ लेख जो इसकी भाषा शैली का कलेवर प्रदान करेंगे :
कार्य को व्यवहार से ऊपर रखना
“नम्र व्यवहार और ईमानदार कार्य किसी भी व्यक्ति को
सम्मान दिलाते हैं।”
— डेल कार्नेगी
लोगों से बात करते वक़्त आपको सुनने को मिल सकता है
कि मैंने काम खूब किया लेकिन श्रेय नहीं मिला, श्रेय तो
अमुक इंसान को मिल गया क्योंकि वो अमुक, साहब/रिश्तेदार
के हाँ मे हाँ मिलाते रहता हैं उनका मनोरंजन किया करता है!
आइए कुछ चीजों पर गौर करते हैं: यदि इसे पिछले
अध्याय से जोड़ें तो हम पाएंगे कि जब इंसान कर्म को उचित
स्थान नही देता अपने जीवन मे, तो वह कर्म करने वाले को
कैसे उसका श्रेय दे सकता है ? दूसरा अगर कोई इंसान
चापलूसी पसंद है, उसे हर वक्त अपने आस पास चापलूसों की
भीड़ चाहिए हो जो उसके अहम को पुष्ट कर उसका मनोरंजन
कर सकें, फिर ऐसे इंसान के लिए अपने चापलूसों को नाराज
कर पाना संभव नही हो पाता, क्योंकि वह उनकी
अनुपस्थिति मे खुद को महत्वहीन और अकेला महसूस करता
है, इसीलिए वह इस भावनात्मक दबाव कि कहीं वह अकेला
न पड़ जाए, किसी के कार्य का श्रेय किसी और को दे देता है |
एक और कारण हो सकता है की कार्य कि गुणवत्ता का
आंकलन कर पाने कि क्षमता का न होना, नतीजतन ऐसे लोग
व्यवहार के आधार पर लोगों का मूल्यांकन करते हैं और यह
भूल जाते हैं कि जो इंसान खूब काम करता हो, उसके लिए
अपने व्यवहार को संयत रखना या मीठी मीठी बातें करना
अपेक्षाकृत मुश्किल होता है, उन लोगों की अपेक्षा जिनकी
दिनचर्या का अधिकतम वक़्त ही मन बहलाने वाली और
टाइम पास बातें करना होता है|
अगर इसकी तह तक जाएँ तो मेरे ध्यान मे दो बातें आती
हैं पहला कि कार्य को और उसकी गुणवत्ता को जीवन मे
उचित स्थान मिले और दूसरा
कार्य पहले और व्यवहार बाद
में का उसूल आपके पास कोई और उपाय हो तो लिख भेजें
काम स्वयं मे पुरस्कार है, नकि पुरस्कार पाने का रास्ता
- डॉ विजय अग्रवाल
अभिव्यक्ति के लिए माहौल
असहमति से असुरक्षा की भावना पैदा होती है, लेकिन
इसे व्यक्त करना जरूरी ताकि इस बार बात हो सके और
एकमत होने की संभावनाओं पर विचार भी |
किसी काम को करने मे कितनी सहजता होगी यह इस
बात पर निर्भर करता है कि काम करने वाला व्यक्ति किस हद
तक उस काम के पीछे के तर्क से सहमत है, यदि कोई
असहमति है तो असहजता भी होगी और उसका प्रतिकूल
प्रभाव कार्य की गुणवत्ता पर पड़ेगा, इसीलिए जरूरी है हम
उस इंसान की असहमति, दिक्कतों को सुनें, उसे अपनी बात,
दृष्टि, समझ और मत को अभिव्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित
करें, और जब वह अपनी बात रख रहा हो तो उसे बिना बीच
मे टोंके, उसकी पूरी बात सुने और जहां पर आप असहमत हों
वहाँ विनम्रतापूर्वक उस असहमति को दर्ज करने और सामने
वाले व्यक्ति से अपनी बात फिर से समझाने का आग्रह करें
और उसकी बातों को उसकी पृष्ठभूमि से जोड़कर समझने का
प्रयास करें, खुद को उसकी जगह रखकर सोंचे|
अभिव्यक्ति का माहौल तब ही बनता है जब हम सामने
वाले इंसान की बातों को इत्मीनान से सुनें और बिना किसी
पूर्वाग्रह के उसकी भावनाओं की कद्र करते हुये, उस इंसान
पर बिना कोई लेबल लगाए, बात की जड़ मे जाकर उससे
अपनेपन के साथ बात करते हैं |
असहमति से असुरक्षा की भावना पैदा होती है अतः इस
पर बात करें और इस बात का ध्यान रखें कि दो लोग साथ
क्यों हैं, माने वो साझा हित क्या हैं या फिर जिन बिन्दुओं पर
पहले ही सहमति है उनका महत्व क्या है आपके जीवन में,
इस तरह असहमतियों पर बात करना सहज होगा|
एक बात और जोड़ना चाहूँगा कि अगर हमे किसी का
सहयोग चाहिए तो उसकी बात और नजरिए को भी उचित
स्थान देना जरूरी है, यदि हमने उसकी बात को सिरे से नकार
दिया तब तो उसे यही लगेगा कि वो उस काम मे हितधारक
ही नहीं, इसीलिए चर्चा जरूरी है
और जब सारे संशय दूर होते हैं तो कार्य हो या उस इंसान
का साथ, हमे पूरा मिलता है और इससे जन्म होता है सुरक्षा
की भावना का|
“जहाँ सम्मान होता है, वहाँ विश्वास भी जन्म लेता है।”
— महात्मा गांधी
आशा है कि पुस्तक अपने अभीष्ट उद्देश्य को पाए, मैं अपने प्रयास में कितना सफल रहा, यह आपकी प्रतिक्रिया से ही पता चलेगा, इंतज़ार रहेगा|
आपका लवकुश
ईमेल आई डी - lovekush@iitdalumni.com
Lovekushchetna@gmail.com
It is a matter of great happiness for me that the book I have been working on for so many months will soon be available to students. Before that, I am presenting an excerpt from the main book to all of you for introduction and your feedback. Please be sure to send your response by email at: KCPHYQA@GMAIL.COM
A name that is in accordance with its purpose:

The author’s introduction is necessary and also relevant for the evaluation of the book’s content.

Why should this book be purchased, and how can it be different from other books? A few points on this:

Since this book is for students, some of the problems faced by students that have been addressed are:


Some reasons that made it necessary to write this book:


Some examples of "step by step solution" from the book


Five point SOP

• To obtain the main book, please fill out the “Pre-booking of Book” query form on the website (Lovekushchetna.in).
• No one can make you feel inferior without your consent.
— E. Roosevelt
• Best wishes in abundance — towards excellence through practice.
• If you have any doubts, please write to KCPHYQA@gmail.com
A phone recharge may last for a month, but a book can last for many years.
Many younger brothers and sisters can read it, and there is no time restriction.
No matter how many times a student reads it, unlike a mobile phone, it does not strain the eyes.
Moreover it does not suggest advertisements or unnecessary short videos.
Please do let me know how well the book lives up to its objectives. Before that, kindly book your copy or submit a demand through your nearest book seller (please fill in the address form for the book - https://kumarchetna.in/pre-booking.php).
Best wishes
Yours,
Lovekush Kumar
The objective is to provide students with solutions to their challenges and mistakes, enabling them to achieve a better understanding of physics and achieve good scores to fulfill their dreams.
Best wishes
- Lovekush Kumar

उद्देश्य - विद्यार्थियों को आने वाली दिक्कतों और उनसे होने वाली चूक के उपाय के तौर पर ताकि वह भौतिकी की बेहतर समझ के साथ अच्छा स्कोर करके अपने सपनों को पंख दे सकें |
शुभकामनाएँ
- लवकुश कुमार

The objective is to provide students with solutions to their challenges and mistakes, enabling them to achieve a better understanding of physics and achieve good scores to fulfill their dreams.
Best wishes
- Lovekush Kumar
उद्देश्य - विद्यार्थियों को आने वाली दिक्कतों और उनसे होने वाली चूक के उपाय के तौर पर ताकि वह भौतिकी की बेहतर समझ के साथ अच्छा स्कोर करके अपने सपनों को पंख दे सकें |
शुभकामनाएँ
- लवकुश कुमार

The objective is to provide students with solutions to their challenges and mistakes, enabling them to achieve a better understanding of physics and achieve good scores to fulfill their dreams.
Best wishes
- Lovekush Kumar

उद्देश्य - विद्यार्थियों को आने वाली दिक्कतों और उनसे होने वाली चूक के उपाय के तौर पर ताकि वह भौतिकी की बेहतर समझ के साथ अच्छा स्कोर करके अपने सपनों को पंख दे सकें |
शुभकामनाएँ
- लवकुश कुमार