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द्वाराहाट चैप्टर - प्रयोग यात्रा सरिता : उत्तराखंड विज्ञान यात्रा - पद्मश्री प्रो० डॉ हरीश चन्द्र वर्मा सर, साइन्स इन द सर्विस ऑफ सोसाइटी और सोपान आश्रम कानपुर की संयुक्त पहल @PM SRI GGIC Dwarahat

बीते शनिवार (23 मई 2026) को सुंदर उत्तराखंड के सुंदर अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट ब्लॉक में स्थित पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित विज्ञान यात्रा- प्रयोग यात्रा सरिता – प्रयास 2026 के अंतर्गत एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, यह कार्यक्रम साइन्स इन द सर्विस ऑफ सोसाइटी और सोपान आश्रम कानपुर की संयुक्त पहल से आयोजित 21 दिवसीय उत्तराखंड विज्ञान यात्रा के अंतर्गत सम्पन्न हुआ, जिसमें मुझे एक एक विज्ञान प्रेमी के तौर पर शामिल होने का अवसर मिला|

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पदम्श्री अवकाश प्राप्त सम्मानित प्रो० डॉ हरीश चन्द्र वर्मा (आईआईटी कानपुर) और साथ में साइन्स इन सर्विस ऑफ सोसाइटी के कुमाऊं संयोजक भवानी शंकर कांडपाल सर रहे, कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्रधानाचार्य, आदरणीय सोनिका नेगी मैम ने की|

साथ ही सहयोगी , हेमंत उपाध्याय , सोपान आश्रम कानपुर के अनुभव अवस्थी, साइंस इन द सर्विस ऑफ सोसाइटी के कार्यकर्ता विनोद कुमार जोशी ,सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद त्रिभुवन जोशी तथा केंद्रीय विद्यलाय हल्द्वानी से मोहित शर्मा सर पूरी यात्रा में साथ रहे| इस यात्रा का अंत देहारादून में उत्साही फ़िज़िक्स teachers की workshop के साथ होगा, वैबसाइट से कुछ पुरानी छवियाँ - National Workshop of Utsahi Physics Teachers (NWUPT)



कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और सम्मान के साथ, संगीत शिक्षिका सुरभि पंत मैम और उनकी कुशल छात्राओं द्वारा प्रस्तुत संगीतमय वंदना द्वारा हुयी|

जीवंत और कुशल मंच संचालन, एल टी, गणित शिक्षिका भावना जोशी मैम ने किया जिसमें एल. टी विज्ञान की शिक्षिका रेनु तिवारी मैम एवं प्रवक्ता भौतिकी किरन बिष्ट मैम का विशेष योगदान रहा|

विद्यार्थियों को एक यादगार प्रयोगिक और वैज्ञानिक एक्सपोजर मिला साथ ही कार्यशाला बच्चों और शिक्षकों सबके लिए मन बांधने वाली और यादगार रही|  


मै अगर अपनी बात करूँ तो सबसे पहले आभार विद्यालय प्रबंधन का, इतनी बेहतर व्यवस्था और आयोजन के लिए, सभी समर्पित और संबन्धित शैक्षिक और गैर-शैक्षिक स्टाफ का आभार क्योंकि "ऐसे आयोजन में सबका अपना योगदान" होता है|

आभारी हूँ साइन्स इन द सर्विस ऑफ सोसाइटी उत्तराखंड (विशेष आभार आदरणीय भवानी शंकर कांडपाल सर का जो कुमाऊँ समन्वयक हैं ) और सोपान आश्रम कानपुर का जिनकी संयुक्त पहल के अंतर्गत यह कार्यशाला हुयी, जिसमें न केवल HC वर्मा सर और उनकी टीम से मिलने का मौका मिला वरन वैज्ञानिक चेतना का माहौल कैसे बने, विद्यार्थियों और शिक्षकों में स्वतंत्र सोच कैसे विकसित हो और कैसे बच्चों को विज्ञान और विषयवस्तु से जोड़ा जा सके, इसके गुर सीखने का भी अवसर मिला|

मैंने सीखा कि कैसे कोई भी अध्याय या बात शुरू करने से पहले कैसे विद्यार्थियों/पाठकों के साथ कम्युनिकेशन स्थापित किया जाये ताकि आगे वह हमारी बात को और अच्छे से सुन/पढ़ सकें- यह सीख न केवल विद्यार्थियों/युवाओं को कुछ समझाने में मददगार होगी वरन पुस्तक लेखन में भी लाइटर नोट से बात शुरू करने का तरीका पाठकों का मन बांधने में उपयोगी होगा|

विद्यार्थियों को विषयवस्तु से जोड़ना-

मैंने देखा कि कैसे वर्मा सर और उनकी टीम द्वारा विद्यार्थियों से छोटे-छोटे आसान सवाल (अवलोकन पर आधारित जैसे की धागा किस रंग का है, लाल धागा अंधेरे मे किस रंग का दिखेगा इत्यादि) करके न केवल उनका हौसला बढ़ाया बल्कि उन्हे विषय वस्तु से जोड़ लिया और भवानी सर द्वारा बच्चों के नाम पूछकर, उनके नाम को भी उस चर्चा का हिस्सा बना लेना ये साबित करता है कि शिक्षक यदि हाजिरजवाब है तो बच्चों के साथ संवाद स्थापित करना और उन्हे इन्वाल्व करना कितना आसान हो जाता है जैसे कांडपाल सर ने एक प्रयोग के दौरान एक बिटिया से उसका नाम पूछा, जवाब आया, “हितैषी” तुरंत कांडपाल सर कहते हैं कि अरे वाह देखो हरीश सर भी हमारे कितने हितैषी हैं जो आज हमारे बीच आए हैं |

विद्यार्थियों और शिक्षकों की तन मन से उपस्थिति सुनिश्चित करना- 

अपने सवालों द्वारा (puzzle method द्वारा attention ensure करना) वर्मा सर और उनकी टीम ने सभी श्रोताओं को कार्यशाल से जोड़े रखा| 

कई बार ऐसा होता है कि हम कहीं बैठे होते हैं और मन कहीं होता है, यह हमारे और विद्यार्थियों सबके साथ होता है, सोचिए कि यदि ऐसा हो कि हम हर काम को इन्वाल्व होकर करना अपनी आदत मे लाएँ तो न केवल हमारी मन स्थिति बेहतर होगी साथ ही बच्चे हम से सीखकर यही आदत ला पाएंगे और फिर रिवीजन क्लास लेने की जरूरत, या बार बार समझाने की जरूरत न पड़ेगी|

इस तरह की कार्यशाला में टाइम कब बीत जाता है पता ही नहीं चलता, इस तरह का इन्वाल्व्मेंत न केवल हमे और बच्चों को बेहतर अवलोकन मे मदद करता है बल्कि वर्तमान मे भी रखता है| यदि इस तरह का इनवल्वमेंट हम अपने हर काम मे सुनिश्चित कर सकें तो ये मन पास्ट और फ्युचर के चक्र से बाहर निकम हमे वर्तमान मे जीने मे मदद कर पाएगा और हमे चीजों को ढंग से अवलोकित कर पाएंगे|

सबसे महत्वपूर्ण कि कभी कभी ऐसा होता है कि विद्यालय मे लैब बनाने के साधन बहुत सीमित और कभी कभी न के बराबर होते हैं, उस अवस्था में भी कैसे बहुत आधारभूत और आसानी से मिलने वाले सामान से कुछ ऐसे प्रयोग किए जा सकते हैं जो बच्चों मे वैज्ञानिक चेतना जागा सकें, जैसे इस कार्यशाला में, "सामान्य लेजर पोइंटर, समतल दर्पण, पानी की बोतल, काँच का गिलास, सिक्का, रिंग चुंबक, इंजेक्शन वाली सिरिन्ज आदि" चीजों से बच्चों को प्रयोग कराये आगे, माने जैसा बजट हो वैसी व्यवस्था की जा सकती है|     

ऐसी ही सामग्री के साथ प्रयोग के लिए आदरणीय वर्मा सर की वैबसाइट का अवलोकन किया जा सकता है, संदर्भ के लिए कुछ लिंक दिये जा रहे हैं: 

https://hcverma.in/

https://www.shiksha-sopan.org/

Common Misconceptions of Physics PGTs in topics based on quantum Physics

Learning Physics through Simple experiments

Developing equations of light path in Mirage-like situations

कार्यशाल इतनी इनवोलविंग थी कि कार्यशाला पूरी होने के बाद बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था, मै दावे से कह सकता हूँ कि कार्यशाल में मौजूद ज़्यादातर शिक्षकों का अध्यापन का तरीका बदलेगा और बहुत से बच्चे आगे विज्ञान के क्षेत्र में बेहतर करने का मन बना चुके होंगे, एक ऐसी कार्यशाला जिसमें हम शुरू से अंत तक शामिल रहे तन और मन दोनों से, बच्चों के लिए तो यह ताउम्र याद रखने वाला अनुभव होगा, ऐसा विश्वास है|


प्रस्तुत हैं उपस्थित कुछ शिक्षकों के अनुभव -

डा0 एच0 सी0 वर्मा जी जो एक milestone और icon है उनके द्वारा जो आसानी से उपलब्ध और कम लागत वाली सामग्री से प्रयोग कराए गए, सही मायने में “ उन्होंने बताया कि केवल सिद्धांत पढ़ लेना विज्ञान नहीं है, बल्कि उसे प्रयोग द्वारा परखना ही वास्तविक विज्ञान है। तर्क हमें सोचने की दिशा देता है और प्रयोग उस तर्क की सत्यता सिद्ध करता है।”

 -प्रकाश चन्द्र जोशी सर, सहायक अध्यापक विज्ञान, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ईरा चौधार द्वाराहाट अल्मोड़ा


कार्यशाला ने हमें यह महसूस कराया कि किस प्रकार सरल प्रयोग, उनसे जुड़े प्रश्नों की श्रृंखला और विचारपूर्ण चर्चाएँ एक बेहतर शिक्षण वातावरण का निर्माण करती हैं तथा रचनात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं।

जब हम प्रयोगों का अवलोकन कर रहे थे, तब हम यह समझने का प्रयास कर रहे थे कि ऐसा क्यों हो रहा है। कार्यशाला से मिली एक महत्वपूर्ण सीख यह रही कि सबसे अधिक सीख तब होती है जब हमारा मन किसी प्रश्न पर अटक जाता है। उसके बाद मन स्वयं उत्तर खोजने के लिए सक्रिय हो जाता है, और इस प्रकार प्राप्त ज्ञान लंबे समय तक स्मरण रहता है।

इसके अतिरिक्त, कार्यशाला में हमने यह भी अनुभव किया कि सीखने की "प्रक्रिया" अंतिम परिणाम से अधिक महत्वपूर्ण होती है। जीवन में भी मंज़िल से अधिक महत्वपूर्ण उसकी यात्रा होती है।

-मदन मोहन सुंदरियाल सर, प्रवक्ता भौतिक विज्ञान रा इ का बिन्ताएवं विज्ञान समन्वयक ब्लॉक द्वाराहाट


सबसे अच्छी बात जो मुझे सीखने को मिली वो यह है कि अपने विषय को पढ़ाने के तरीके को Puzzle Method द्वारा बनायें, जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चे उसमें involve हों और actively participate कर अपने ideas दें।

ये भी सीखा कि हमारे आस-पास हर वस्तु और घटना के पीछे विज्ञान है, इसलिए वो नज़रिया विकसित करना होगा, जिससे हम उन घटनाओं को विज्ञान के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर, बच्चों में विज्ञान के प्रति सहजता उत्पन्न कर सकें।

- प्रीति राणा मैम, LT GIC Asgoli, Almora


आइए कुछ विस्तार मे समझते हैं -

कुछ बातें जो इस कार्यशाला में अवलोकन मे आयीं सीधे उनको उद्धृत करता हूँ:

विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करने का तरीका, कुछ वाक्य जिन्होने ने केवल बच्चों के मन को बांध लिया बल्कि उपस्थित शिक्षकों और अन्य लोगों के चेहरे पर मुस्कान और बीच बीच में हंसी लाकर माहौल को जीवंत बनाये रखा: -

  • अलंकृत और गैर अलंकृत शिक्षक और प्यारे बच्चों, सबको मेरा.... मेरा क्या ? सबको मेरा नमस्कार - HCV सर

  • अच्छा आपका नाम हितैषी है, देखो वर्मा सर भी हमारे हितैषी हैं जो आज हमारे बीच आए हैं - भवानी शंकर कांडपाल सर

  • भवानी सर ने इस बात से शुरुआत की कि गणित कैसा लगता है आप सबको?

  • ऐसे वर्मा सर ने बच्चों से पूछा कि सबसे खराब विषय कौन सा लगता है आपको?

अवलोकन करना सिखाया:

  • धागा किस रंग का है?

    अच्छा लाल है

    क्या अंधेरे में भी लाल ही रहेगा?

    अच्छा अंधेरे में काला दिखेगा

    लेकिन काला धागा क्या कभी लाल दिखता है!

    और क्या है यहाँ आइए देखते हैं?

  • अच्छा, ये मैगनेट है, इसके बीच में छेंद क्यों

  • ये क्या है ? मिरर, अरे वाह पीछे से ही पहचान लिया

    अच्छा शीशे में अपना चेहरा देख पा रहे ?

    शीशे में कहाँ हो ? खंभे के अंदर (शीशे को खंभे से  सटाकर रखते हुये)

  • हम स्कूल क्यों आते हैं ? पढ़ने

  • खेलने नहीं आते ? आते हैं
  • तो आज हम खेलेंगे

  • कौन कौन डॉ बनना चाहता है

  • ये सिरिन्ज इसीलिए नहीं चल रही है क्योंकि ये कह रही की कांडपाल सर ने जो इसके छेंद पर अंगूठा रख रखा है तो अब यह नहीं चलेगी

  • अच्छा किसने कहा की इसके कान खराब हैं, चलो इसे ही बुलाओ आँख और कान के समन्वय वाले प्रयोग के लिए 

कुछ प्रयोग जिन्हे शामिल किया गया: (कुछ विडियो यूट्यूब पर उपलब्ध हैं, लिंक लेख में आगे उपलब्ध कराये गए हैं)

  • कान और आँख का समन्वय
  • Hand eye coordination
  • लेजर का उपयोग करके परावर्तन को समझाने का प्रयास
  • रुमाल को झटकने पर पाउडर झड़ जाता है, क्यों ? नहीं जड़त्व नहीं, बात कुछ और है|
  • सिक्के को एक बोतल के मुह पर रखकर, हाथ से ऊष्मा देकर हवा की ऊष्मीय गति बढ़ाने का प्रयोग
  • तीन पोल वाले मैगनेट से जुड़ा बेहतरीन प्रयोग|
  • एक छड़ एक एक सिरे पर एक बस्ता टाँगकर ये बताना की बस्ता भले ही नीचे को गिरने की टेंडेंसी रखता हो, आघूर्ण को संतुलित करने के लिए हमें छड़ कोअंगूठे से  नीचे की ओर दबाना भी पड़ता है|
  • छवि देखने के लिए हमरे दिमाग का अभ्यास कैसा है, पानी से भरे गिलास के पीछे का तीर या पेन हमे एक दूरी पर उल्टा तो एक दूरी पर सीधा क्यों दिखाई देता है|
  • इंजेक्शन वाली सिरिन्ज की कार्यविधि से निर्वात की अवधारणा समझाई गयी जिसमें बच्चों को खूब मज़ा आया, एक सिरिंज ली, जिसकी नोजल टूटा हुआ था फिर उससे निर्वात की अवधारणा को समझाने का प्रयास किया गया

कुछ बातें जो सीधे शिक्षकों से कही गयीं-

  • प्रयोग से नियमित जीवन में डर खत्म होगा, कम होगा
  •  वैज्ञानिक गढ़ने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी शिक्षकों और फिर अभिभावकों की होती है ताकि वैज्ञानिक चेतना, सवाल करने का, स्वतंत्र सोच का माहौल बन सके
  • तकनीकों को अपनी कार्यशाला में जीवंत करें
  • कक्षा की शुरुआत के लिए ऐसे टॉपिक से शुरू करें जिस पर कमेंट करना या जवाब देना बच्चों के लिए अपेक्षाकृत आसान हो
  • सूक्ष्म अवलोकन के लिए तैयार करें विद्यार्थियों को
  • कान्सैप्ट को हमारे दैनिक जीवन से संबन्धित करते हुए समझाने का प्रयास करें 
  • बच्चों में जिज्ञासा होती है, जरूरत है उसे पोषण देने की, जोकि उन्हे सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करने से मिलेगा 
  • बच्चे आपसे बेहतर सीख पाते हैं जब वो जुड़ाव महसूस करते हैं इसलिए जरूरी है शिक्षक कम्युनिकेशन में भी उस्ताद हो ताकि संवाद स्थापित करने में कम से कम समय लगे|
  • उपदेशों का अमूमन पालन नहीं होता है इसीलिए जरूरी है कि पहले अपने व्यवहार मे लाओ सवाल पूछना, नयी नयी परिस्थितियाँ उत्पन्न करना 
  • सोचने पर ज़ोर देने वाली गतिविधियां शामिल हों शिक्षण में|
  • जीवन की सफलता ही है स्वतंत्र सोच के विकास में| 
  • यदि बच्चों को नयी स्थितियों के लिए तैयार करना है तो उनमे स्वतंत्र सोच विकसित करने पर काम करना होगा और साथ में कम करना होगा, बंद करना होगा परीक्षा मे उनके द्वारा हासिल किए गए अंकों का महिमामंडन |
  • कार्य कारण सिद्धान्त में प्रक्रिया मायने रखती है, अगर प्रक्रिया के सारे चरण पता हैं तो किसी भी बदलाव को पकड़ा जा सकता है, और उसे समझाया भी जा सकता है |
  • सवाल पूछना सीखो और सिखाओ भी
  • जिज्ञासा जगाना भी आपका काम
  • Situations create करो और फिर discuss करो,
  • इस तरह के कुछ सवाल पेपर मे भी शामिल करो और साथ ही उनकी परंपरागत परीक्षा में जो कुछ आता है उसके लिए भी उन्हे तैयार करो, एक अनुपात निर्धारित करो
  • Identical experiments in identical situations may produce different results.
  • लर्निंग must be joyful.
  • भ्रम की अवस्था में प्रयोग को दोहराया जाना चाहिए
  • एकसमान अवस्थाओं में और विभिन्न परिस्थितियों में प्रयोग को दोहराकर हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं
  • Inertia का concept qualitative है
  • मेरा बोलना मेरे अधिकार मे है, और उनका सुनना या समझना उनके अधिकार में
  • Attention create करना आपकी ज़िम्मेदारी है
  • Puzzle वाली स्थिति उत्पन्न करके विद्यार्थियों का ध्यान खींचिए कि अरे ये क्या हो गया ?

HCV सर की कुछ कविताओं का संग्रह -  https://hcverma.in/Poems

एक शिक्षक के सवाल पर कि यदि कोई विद्यार्थी पूछे कि अमुक कान्सैप्ट का जीवन में क्या इस्तेमाल? प्रस्तुत HCV सर का जवाब:

इस पर वर्मा सर ने बताया कि, “सब कुछ brain driven है और यह शिक्षा हमारे दिमाग़ को विकसित करने का एक साधन है , हम जो कुछ भी विषय आज पढ़ रहे’ हैं वह सीधे तौर पर भले ही हमारे पेशे में काम न आए लेकिन उस विषय को समझते हुये जो तार्किक क्षमता विकसित होती है हमारे भीतर, वह क्षमता ही आगे चलकर हमे चीजों को समझने, समझाने, सृजन करने और निर्णय लेने में मदद करती है| यह तार्किक क्षमता हमे नयी नयी परिस्थितियों से निपटने में मदद करती है|”

समाज को लेकर कुछ बातें जो कार्यशाल में सामने आयीं:

  • धरती मेरी है तो इसे बचाने की ज़िम्मेदारी भी मेरी 
  • आज के समाज में बहुत दिक्कतें बढ़ गई हैं क्योंकि सफलता के मापदंड बढ़ गए हैं और सच्चाई के ऊपर दिखावे और झूठी प्रतिष्ठा को मान मिल रहा है| 
  • आनंद सबसे आगे नहीं, सबके साथ चलने मे है| 
  • जैसे हम खुद के लिए पौष्टिक आहार तलाशते हैं वैसे ही हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम बच्चों को सही और संतुलित शिक्षा दें|
  • कोचिंग और ट्यूशन का महत्व बढ़ा हुआ है क्योंकि आज सफलता/प्रतिष्ठा का मापदंड अंक बने हुये हैं|
  • ये अन्याय है बच्चों के साथ कि हम उन्हे अधिक से अधिक अंक लाने की ओर धकेल रहे हैं और उनकी स्वतंत्र सोच पर काम नहीं कर रहे
  • आप ऐसे ही समझिए कि शुरुआत में बच्चों का दिमाग़ कितना तेज होता है कि वह एक भाषा सीख लेते हैं हजारों शब्द याद कर लेते हैं,  लेकिन अंक लाने की अपेक्षाओं का दबाव उनके विकाश की प्रकृतिक प्रक्रिया को बाधित कर देता है|
  • एआई के चलते निर्णय लेने और सोचने-समझने की क्षमता की जरूरत और बढ़ जाएगी
  • कांडपाल सर ने बताया कि त्रिभुवन सर का योगदान है हजारों पौधे लगाने में
  • अगर हम इस हवा इस माहौल इस पर्यावरण को स्वच्छ रखेंगे तो उसमें हमारे ही अपनों को सहजता और सुविधा होगी
  • स्वाभाविक रूप तो simple ही होता है

केएन जोशी सर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अध्ययन में लेखन कौशल और गणनात्मक कौशल बहुत जरूरी

कार्यशाला का हिस्सा शिक्षकों के प्रश्नोत्तर का भी रहा|

कार्यशाला का प्रभाव ऐसा रहा कि संगीत शिक्षिका सुरभि पंत मैम ने भी कहा कि वाकई भौतिकी को हम जीवन के कई क्षेत्रों से जोड़ सकते हैं जैसे कि संगीत में, कंपन्न, आवृति और अनुनाद से|

कार्यशाला से जुड़े कुछ विडियो नीचे दिये गए लिंक से देखे जा सकते हैं 

पीएमश्री रा०क०इं०का० द्वाराहाट की छात्राओं द्वारा मन को सुकून देने लेने वाला गायन| https://www.youtube.com/watch?v=XOrKWeNIMIA
पानी से भरे गिलास या पारदर्शी बोतल के उस तरफ कलम की निब का उल्टा और सीधा दिखाई देना https://www.youtube.com/watch?v=Y9uzBinRul4&pp=0gcJCQoLAYcqIYzv
वायुदाब, घनत्व और तापमान पर HC वर्मा सर के विचार और विश्लेषण और साथ में उदाहरण प्रैशर कुकर का| https://www.youtube.com/watch?v=7dafkrhKUl8
छड़, उस पर टंगा झोला, बल और बल आघूर्ण, संतुलन के लिए विभिन्न बल और मांसपेशियों में तनाव https://www.youtube.com/watch?v=v7Z9SyvachY
ऊष्मीय गति या तापमान के बढ्ने से बढ़ता वायुदाब- अनुभव जी और मोहित सर https://www.youtube.com/watch?v=oD1yeAwIxOM
गिलास, सिक्का और कार्ड बोर्ड: जड़त्व या कुछ और? एक समीक्षा, एक एप्रोच- HC Verma सर https://www.youtube.com/watch?v=gWcPqAwL450
रुमाल से पाउडर के कण झड़ने का कारण जड़त्व से अलग- HC Verma सर https://www.youtube.com/watch?v=hDFvhuLTNzE
जो राह चुनी तूने, उसी राह पे राही चलते जाना रे- गायन सुरभि पंत मैम https://www.youtube.com/shorts/bf_QC6SEcKY

साइन्स इन द सर्विस ऑफ सोसाइटी के बारे में और जानने या सदस्य बनने के लिए ईमेल करें- sss.dbu@gmail.com  या संपर्क करें - 9528237575

पता- Kashmiri Colony, Niranjanpur, dehradun

कार्यशाला का समापन शामिल शिक्षकों को सहभागिता का प्रमाण पत्र उपलब्ध कराकर, धन्यवाद ज्ञापन और समूह फोटो से किया गया|


कई शिक्षकों ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ होती रहें ताकि उनके अध्यापन और शिक्षण के तरीके मे बेहतरी होती रहे|

कार्यशाला से संबन्धित कुछ समाचार: 

https://www.thetoptennews.com/archives/32605

 

 

  • विज्ञान के साथ पर्यावरण भी

IAPT और Shiksha Sopaan की एक और पहल ( https://naest.shiksha-sopan.org/ ) - जिसके बारे में कार्यशाल में बात हुई, विद्यार्थियों को इसका लाभ जरूर लेना चाहिए:


फीडबैक / प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, के लिए यहाँ क्लिक करें |

अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ  साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें  नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो  kumarchetnapsw@gmail.com पर ईमेल कर दें

शुभकामनाएं

-लवकुश कुमार

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प्रस्तावित पुस्तक - भौतिकी JEE Mains विशेष

उद्देश्य - विद्यार्थियों को आने वाली दिक्कतों और उनसे होने वाली चूक के उपाय के तौर पर ताकि वह भौतिकी की बेहतर समझ के साथ अच्छा स्कोर करके अपने सपनों को पंख दे सकें |

शुभकामनाएँ

- लवकुश कुमार

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उद्देश्य - विद्यार्थियों को आने वाली दिक्कतों और उनसे होने वाली चूक के उपाय के तौर पर ताकि वह भौतिकी की बेहतर समझ के साथ अच्छा स्कोर करके अपने सपनों को पंख दे सकें |

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- लवकुश कुमार

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- लवकुश कुमार

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शुभकामनाएँ

- लवकुश कुमार

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OK Physics - एक तरीका यह भी ( लवकुश कुमार ) - पुस्तक परिचय

यह मेरे लिए खुशी की बात है कि जिस पुस्तक के लिए, इतने महीनो से प्रयास चल रहा है वह जल्द ही पाठकों के लिए उपलब्ध होगी, उससे पहले मुख्य पुस्तक का एक अंश आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत है, परिचय और आपकी प्रतिक्रिया के लिए, जरुर भेजें ईमेल - KCPHYQA@GMAIL.COM

नाम जो उद्देश्य के अनुरूप है :

लेखक का परिचय जरूरी है और प्रासंगिक भी, पुस्तक की सामग्री के आंकलन में 

ये किताब क्यों खरीदें, अन्य किताबों से यह किस तरह अलग हो सकती है? कुछ बातें इस पर :

स्टूडेंट्स के लिए है अतः स्टूडेंट्स की कुछ समस्याएँ जिन्हें संबोधित किया गया है :

कुछ बातें जिनके चलते इस पुस्तक को लिखने की जरुरत पड़ी:

अंत में एक सन्देश जो किताबों के महत्त्व पर है, मोबाइल फ़ोन और शॉर्ट्स की दुनिया में किताबों से दोस्ती करने की बात पर जोर देते हुए :

किताब अपने उद्देश्यों पर कितनी खरी उतरी जरुर बताएं, उससे पहले अपनी प्रति book कराएँ या अपने निकटतम पुस्तक विक्रेता द्वारा डिमांड सबमिट करवाएं (पुस्तक के लिए अपने पते का फॉर्म भरें )

शुभकामनाएं 

आपका

लवकुश कुमार

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कार्य, ऊर्जा और शक्ति से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1. कार्य तब किया जाता है जब किसी पिंड पर लगाया गया बल, पिंड को लगाए गए बल की दिशा में एक निश्चित दूरी तक ........................कर देता है। इसे बल और बल की दिशा में चली गई दूरी के गुणनफल से मापा जाता है, अर्थात W = F.S

2. दूसरे शब्दों में, कार्य बल और विस्थापन का ".................... गुणनफल" है। अतः यदि बल और विस्थापन एक-दूसरे के लंबवत हैं, तो उनका
अदिश गुणनफल शून्य होगा, जिससे W=0 होगा | या कारक द्वारा किया गया कार्य W, विस्थापन की दिशा में बल के घटक और विस्थापन के परिमाण का गुणनफल होता है।

3.यदि हम लगाए गए बल और विस्थापन के बीच एक ग्राफ बनाते हैं, तो F-s ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल ज्ञात करके किया गया ....................प्राप्त किया जा सकता है।
4.गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल .................................... होता है, क्योंकि यहाँ बल गति की दिशा के लंबवत है।
5. स्प्रिंग सिस्टम - यदि किसी स्प्रिंग को उसके बिना खिंचे हुए विन्यास (सामान्य अवस्था) से थोड़ी दूरी तक खींचा या संपीड़ित किया जाता है, तो स्प्रिंग बाह्य कारक पर एक बल लगाएगी जोकि उसकी प्रत्यास्थता के चलते उत्पन्न होता है, जो इस प्रकार है: F = -kx, जहाँ x स्प्रिंग में संपीड़न (कम्प्रेशन) या दीर्घीकरण (elongation) है, k एक स्थिरांक है जिसे ............................. स्थिरांक कहते हैं| ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि स्प्रिंग बल की दिशा " x " के विपरीत है (x मुक्त सिरे का विस्थापन है।)

6. उपरोक्त स्थिति में स्प्रिंग में संग्रहित स्थितिज ऊर्जा E= (1/2) k x^2 होगी। यह स्पष्ट है कि E, खिंचाव या संपीडन के ........................के समानुपाती होता है। इसलिए यदि खिंचाव "x" के लिए ऊर्जा "E" है, तो "3x" के लिए ऊर्जा 3^2E अर्थात् "9E" होगी।

7. बल या स्प्रिंग स्थिरांक (नियतांक) का मान स्प्रिंग की बिना खिंची हुई लंबाई और स्प्रिंग के.......................... की प्रकृति (प्रत्यास्थता गुणांक)पर व्युत्क्रमानुपाती रूप से निर्भर करता है।
ऊर्जा

 किसी पिंड की ऊर्जा उसकी कार्य करने की क्षमता होती है। ऊर्जा को कार्य की इकाई, अर्थात् जूल या erg या वाट या किलोवाट, में मापा जाता है।
    यांत्रिक ऊर्जा दो प्रकार की होती है: गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा
गतिज ऊर्जा
8. किसी पिंड द्वारा अपनी ....................के कारण धारण की गई ऊर्जा को उसकी गतिज ऊर्जा कहते हैं। m द्रव्यमान और v वेग वाली किसी वस्तु के लिए, गतिज ऊर्जा निम्न प्रकार से दी जाती है:  K.E. = ( 1/2 ) mv^ 2
 स्थितिज ऊर्जा
किसी पिंड द्वारा अपनी स्थिति या अवस्था के कारण धारण की गई ऊर्जा को उसकी स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
स्थितिज ऊर्जा के दो सामान्य रूप हैं: गुरुत्वाकर्षण और प्रत्यास्थ।

  • किसी पिंड की गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा, पृथ्वी की सतह से ऊपर या गहराई में अपनी स्थिति के कारण धारण की गई ऊर्जा है।

इसे निम्न प्रकार से व्यक्त किया जाता है: P.E. = mgh, यह एक सापेक्ष मान है, इस स्तिथि में ऐसा माना गया है कि की पृथ्वी के सतह पर स्थितिज उर्जा शून्य है |

जहाँ m —> पिंड का द्रव्यमान
g —> पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण। h —> पिंड को ऊपर उठाए जाने की ऊँचाई ( यह सूत्र तब है उपयोगी है जब h का मान पृथ्वी की त्रिज्या की तुलना में बहुत कम हो अन्यथा हमें g के मान में परिवर्तन का संज्ञान भी लेना होगा )
स्प्रिंग के लिए ऊपर वर्णित ऊर्जा प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा का एक उदाहरण है।


कार्य-ऊर्जा प्रमेय
9. कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी पिंड पर बल द्वारा किया गया कार्य, पिंड की .................................ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। KE- गतिज उर्जा 
W (कार्य ) जहाँ  W= KE_2 – KE_1, जोकि परिवर्तन को अंतिम मान (स्थिति-2) घटा प्रारंभिक मान (स्थिति-1) के रूप में परिभाषित किया जाता है।


ऊर्जा संरक्षण का नियम-

10. ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, एक विलगित (आइसोलेटेड) निकाय की कुल ऊर्जा में ...............................नहीं होता है।
11. ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में ...................हो सकती है, लेकिन एक विलगित निकाय की कुल ऊर्जा स्थिर रहती है।
12. ऊर्जा का न तो सृजन किया जा सकता है, न ही .....................।

 

कणों के बीच टकराव को मोटे तौर पर दो प्रकारों में विभाजित किया गया है।
(i) प्रत्यास्थ टकराव (ii) अप्रत्यास्थ टकराव।
प्रत्यास्थ संघट्ट (elastic collision)
दो कणों या पिंडों के बीच संघट्ट को प्रत्यास्थ कहा जाता है यदि निकाय का रैखिक संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं।
अप्रत्यास्थ संघट्ट (inelastic collision)
यदि निकाय का रैखिक संवेग संरक्षित रहता है, लेकिन उसकी गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं होती है, तो संघट्ट को अप्रत्यास्थ कहा जाता है।
उदाहरण: जब हम गीली पुट्टी की एक गेंद को फर्श पर गिराते हैं, तो गेंद और फर्श के बीच संघट्ट एक अप्रत्यास्थ संघट्ट होता है।


संघट्ट को एकविमीय कहा जाता है, यदि टकराने वाले कण, संघट्ट से पहले और बाद दोनों समय एक ही सरल रेखा पथ पर गति करते हैं।
• एकविमीय प्रत्यास्थ संघट्ट में, संघट्ट से पहले अभिगम (approach) का सापेक्ष वेग, संघट्ट के बाद पृथक्करण के सापेक्ष(रिलेटिव स्पीड ऑफ़ सेपरेशन) वेग के बराबर होता है।
13. प्रत्यास्थता गुणांक (e) को टक्कर के बाद पृथक्करण की सापेक्ष गति और टक्कर से पहले पहुँच की सापेक्ष गति के अनुपात के रूप में
परिभाषित किया जाता है। अतः पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर के लिए e का मान .........................., पूर्णतः अप्रत्यास्थ टक्कर के लिए  शून्य और अन्य टक्करों के लिए 0 और 1 के बीच होता है।
14. संरक्षी बल- किसी बल को संरक्षी कहा जाता है यदि एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक जाने में किया गया कार्य, अनुसरण किए गए................. पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि केवल गतिमान वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर निर्भर करता है।

संरक्षी बलों के उदाहरण हैं:
(i) गुरुत्वाकर्षण बल (ii) स्थिरवैद्युत बल (iii) चुंबकीय बल


15. असंरक्षी बल

किसी बल को असंरक्षी कहा जाता है यदि एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक जाने में किया गया कार्य अनुसरण किए गए पथ पर ................करता है।

असंरक्षी बलों के उदाहरण हैं: (i) घर्षण बल (ii) श्यान बल


नोट- ऊर्जा संरक्षण का नियम संरक्षी और असंरक्षी दोनों बलों पर लागू होता है।


16. संरक्षी क्षेत्र के लिए बंद पथ में कार्य ................होगा या संरक्षी बल के अधीन कार्य ................... होगा जबकि असंरक्षी क्षेत्र के लिए कार्य शून्य
नहीं होगा।


उत्तर : 1. विस्थापित, 2. अदिश, 3.कार्य,4. शून्य, 5. बल या स्प्रिंग, 6. वर्ग 7.पदार्थ, 8.गति, 9.गतिज, 10.कोई परिवर्तन,11.परिवर्तित,12.विनाश,13. 1, 14.पथ. 15.निर्भर, 16.शून्य,शून्य


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गुरुत्वाकर्षण से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

केप्लर के ग्रहीय गति के नियम-
1. केप्लर ने ग्रहों की गति का वर्णन करने वाले ..............नियम प्रतिपादित किए। ये नियम इस प्रकार हैं:
2. कक्षाओं का नियम- प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक ...........................कक्षा में परिक्रमा करता है, जिसमें सूर्य दीर्घवृत्त के किसी एक केंद्र पर स्थित होता है।
3. क्षेत्रफल का नियम- ग्रह की गति इस प्रकार परिवर्तित होती है कि सूर्य से ग्रह तक खींची गई त्रिज्या सदिश समान समय में समान .................को घेरती है।
4. सूर्य के चारों ओर ग्रह की समयावधि (परिक्रमा अवधि) का वर्ग अर्ध दीर्घ अक्ष के घन के समानुपाती होता है। परिणामस्वरूप, सूर्य के निकट स्थित ग्रहों की तुलना में दूर स्थित ग्रहों की परिक्रमण अवधि ...........................होगी।


न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम
5.न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार, ब्रह्मांड का प्रत्येक कण प्रत्येक अन्य कण को ​​एक ऐसे बल से आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के ....................................होता है।

6. बल की दिशा कणों को मिलाने वाली रेखा के ....................होती है। आनुपातिकता के स्थिरांक को सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक कहा जाता है जिसे G से दर्शाया जाता है,
अर्थात इसका मान पूरे ब्रह्मांड में समान रहता है, चाहे आप जिस भी ग्रह या तारे के लिए गणना कर रहे हों।
7. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक स्थिरांक G संख्यात्मक रूप से इकाई द्रव्यमान वाले दो कणों, जो एक-दूसरे से इकाई दूरी पर स्थित हैं, के बीच लगने वाले .......................के बराबर होता है।


गुरुत्वाकर्षण बल के महत्वपूर्ण लक्षण
8.दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल एक केंद्रीय बल होता है, अर्थात यह दो परस्पर क्रिया करने वाले पिंडों के केंद्रों को मिलाने वाली रेखा के ................कार्य करता है।
9.दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल मध्यवर्ती माध्यम की प्रकृति से स्वतंत्र होता है।
10. दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल अन्य पिंडों की उपस्थिति पर .........................करता है।
11. बल का परिमाण अत्यंत ...................होता है।


गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण
12. गुरुत्वाकर्षण बल (पृथ्वी द्वारा लगाया गया बल) के कारण किसी पिंड में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण कहते हैं। इसे आमतौर पर g से दर्शाया जाता है। यह हमेशा पृथ्वी के ...............की ओर होता है।
13. यदि पृथ्वी की सतह पर m द्रव्यमान का कोई पिंड पड़ा है, तो पिंड पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F=mg होता है।
जहाँ g सतह पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है। g = GM/R^2, जहाँ M और R क्रमशः संबंधित खगोलीय पिंड (ग्रह, तारा या
उपग्रह) (उदाहरण के लिए पृथ्वी या चंद्रमा) का द्रव्यमान और त्रिज्या हैं। चूँकि चंद्रमा के लिए M और R छोटे हैं, इसलिए g का मान पृथ्वी के मान से कम होगा, इसलिए चंद्रमा पर किसी पिंड का भार पृथ्वी पर उसके भार से .....................होगा।

भार W=mg है: जहाँ m द्रव्यमान है जो चंद्रमा और पृथ्वी या किसी अन्य ग्रह/उपग्रह पर समान होता है।
 

गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण में परिवर्तन
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण का मान ऊँचाई, गहराई, पृथ्वी के आकार और पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन के साथ बदलता रहता है।
14. ऊँचाई का प्रभाव। जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर जाते हैं, गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण का मान धीरे-धीरे ......................होता जाता है।
15. जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह के नीचे जाते हैं, g का मान ..........................जाता है।
16. भूमध्य रेखा पर पृथ्वी की त्रिज्या ध्रुवों की त्रिज्या से 21 किमी अधिक है, इसलिए उपरोक्त सूत्र से g का मान भूमध्य रेखा की तुलना में ध्रुवों पर .................है।
17. घूर्णन के कारण g का मान घटता है, इसलिए यह भूमध्य रेखा पर सबसे कम और ध्रुवों पर सबसे अधिक होता है क्योंकि घूर्णन अक्ष ध्रुवों से होकर गुजरता है, इसलिए घूर्णन ध्रुवों पर प्रभाव नहीं डालता है।

 

गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र
किसी पिंड के चारों ओर का वह स्थान जिसके भीतर उसका गुरुत्वाकर्षण बल अन्य पिंडों द्वारा अनुभव किया जाता है, गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र कहलाता है।
18. गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता (E) -क्षेत्र में किसी बिंदु पर किसी पिंड के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता को उस बिंदु पर रखे गए इकाई द्रव्यमान के पिंड द्वारा अनुभव किए गए ..............के रूप में परिभाषित किया जाता है, बशर्ते इकाई द्रव्यमान की उपस्थिति मूल गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को विचलित न करे। या E = बल/द्रव्यमान। दूरी r पर द्रव्यमान M द्वारा क्षेत्र E = GM/r^2 है।


19. गुरुत्वाकर्षण विभव- किसी पिंड के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में किसी बिंदु पर गुरुत्वाकर्षण विभव को इकाई द्रव्यमान के पिंड को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है। U = W / द्रव्यमान जहाँ W किया गया कार्य है |
दूरी r पर द्रव्यमान M द्वारा विभव E = .......................है।


20. गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा = गुरुत्वाकर्षण विभव x पिंड का द्रव्यमान। यह एक .................राशि है और इसे जूल में मापा जाता है।
21. पलायन वेग- किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक .............वेग जिससे वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर चला जाए, पलायन वेग कहलाता है।
22. उपग्रह- उपग्रह वह पिंड होता है जो अपेक्षाकृत बहुत बड़े पिंड (ग्रह) के चारों ओर एक कक्षा में निरंतर परिक्रमा करता रहता है। यह कक्षा वृत्ताकार या दीर्घवृत्ताकार हो सकती है। किसी ग्रह की कक्षा में परिक्रमा करने वाली..................को कृत्रिम उपग्रह कहते हैं। 

23. भूस्थिर उपग्रह - पृथ्वी के समान परिक्रमण काल ​​वाले उपग्रह को भूस्थिर उपग्रह कहते हैं। ऐसे उपग्रह भूमध्यरेखीय तल में ...................की ओर घूमते हैं। भूस्थिर उपग्रह की कक्षा को पार्किंग कक्षा कहते हैं। इन उपग्रहों का उपयोग संचार उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
एक भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर एक वृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता है।

उत्तर : 

1.तीन 2.दीर्घवृत्ताकार 3.क्षेत्रफल 4.अधिक 5.व्युत्क्रमानुपाती 6.अनुदिश 7.आकर्षण बल 8.अनुदिश 10.निर्भर नहीं 11.छोटा 12.केंद्र 13.कम 14.कम 15.घटता 16.अधिक 18.बल 19.- GM/r 20. अदिश 21.न्यूनतम 22. मानव निर्मित वस्तु 23.पश्चिम से पूर्व 

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