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कठिन परिस्थितियों में चीजों की परीक्षा

जैसे कई कड़ियों वाली एक सीकड़ की मजबूती या कमजोरी का एहसास उस वक़्त होता है जब उससे एक वजनदार चीज़ लटकाई जाती है, यहाँ पर एक बात ध्यान देने वाली है कि कोई chain उतनी ही मजबूत मानी जाती है जितनी कि उसकी सबसे कमजोर कड़ी |

इस संसार और तंत्र की व्यवस्था मे जो खामियाँ हैं ये उन लोगों को पहले दिखती हैं जो इनसे दो चार होते होते हैं, या जिनका कठिन समय चल रहा होता है| वहीं जिनका समय सुखद चल रहा होता है उन्हे लगता है कि सब कुछ सही चल रहा है, सब चंगा सी |

उद्दहरण के लिए दहेज व्यवस्था से ऐसे लोगों को बिलकुल भी परहेज नही दिखता जिनके पास खूब पैसा है, इस प्रथा कि मार तो वो झेलता है जिसके पास रोटी कपड़े की ही कमाई बड़ी मुश्किल से हो पाती है, ऐसा इंसान एक तनाव मे रहता है और फिर हम शिकायत करते हैं कि लोग प्रेम से क्यों नहीं बात करते !

पहले तो इंसान ऊपरी मानक यथा, शक्ल, पहनावा और दिखावा देखकर रिश्ता बनाता है, दुख कि घड़ी मे जब साथ नहीं मिलता तो कहता कि लोग बड़े मतलबी हैं लेकिन कम ही हैं वो लोग जो अपनी पसंद के आधार को टटोलते हैं|

एक दूसरे को खुश रखने और रिश्ते को बनाए रखने के लिए लोग खूब एक दूसरे कि हाँ मे हाँ मे मिलाते हैं और गलत बातों का भी समर्थन कर देते हैं और इस आदत को वो समझदारी और आज के समय कि जरूरत बोलते हैं लेकिन जब उन्हे लंबे वक़्त तक कोई झूठ के अंधेरे मे रखे तब उन्हे इस सिस्टम की खामी नज़र आती है और वो कहते हैं की लोग बड़े झूठे हैं ! 

किसी भी समस्या कि सबसे बड़ी मार हमेशा कमजोर तबके के लोगों को ही पड़ती है, जलवायु परिवर्तन के चलते गर्मी का प्रकोप सबसे ज्यादा धूप मे काम करने वाले लोगों को पड़ता है न कि उन्हे जिनके घर भी वातानुकूलित हैं, घर के बाहर कार, कार्यालय और रेस्तरां भी |

 

उद्दहरण बहुत से हैं खुद का अवलोकन करने की जरूरत हैं, खुद पर नज़र रखने की जरूरत है कि हम कहाँ पर झूठ बोल रहे हैं ?

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भारत और विश्व के महान व्यक्तित्व -1

बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |

अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |


1. होमी भाभा - नाभिकीय प्रोग्राम 
2. सी. वी. रमन ( रमन इ‌फेक्ट )- नोबेल पुरस्कार 
3. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (मिसाइल मैन)
4. विक्रम साराभाई (अंतरिक्ष वैज्ञानिक)
5. Sardar V. Patel. (freedom fighter)
6. Subhas C. Bose (freedom fighter)
7. Jawahar lal Nehru (freedom fighter)
8. P.C. Ray 
9. श्री विश्वे श्वरैया बृहत भारत के विश्वकर्मा 
10. सेठ जमनालाल बजाज
11. महात्मा गाँधी  (वर्तमान जगत के युग पुरुष )
12.संत विनोबा भावे 
13. ईश्वर चन्द्र विद्यासागर सुधार तथा परोपकार के देवता
14. संत सुकरात (सेवा और सहिष्णुता के आदी) 

15. अब्राहम लिंकन - मानव समानाधिकार के सूत्रधार  

इन जीवनियों को आप किफायती लागत में गायत्री परिवार की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं |

अब्राहम लिंकन और अन्य के लिए लिंक

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विद्युत विभव से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1. विद्युत क्षेत्र में किसी भी बिंदु पर विद्युत विभव, प्रति इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश को ...................................... से उस बिंदु तक बिना
त्वरण के विद्युत बल के विरुद्ध लाने में किए गए कार्य के बराबर होता है।


2. विद्युत विभव एक अवस्था-निर्भर फलन है अर्थात इसका मान इस बात पर निर्भर करता है कि उस बिन्दु कि ..............क्या है जिस पर हमे विद्युत विभव ज्ञात करना है |


3. विद्युत बल ...............................बल होते हैं। (संरक्षी/असंरक्षी)


4. विद्युत क्षेत्र में दो बिंदुओं के बीच विद्युत विभवांतर (अर्थात विद्युत क्षेत्र में दो बिंदुओं के विद्युत विभवों का अंतर)को एक ...........................धनात्मक परीक्षण आवेश को बिना किसी त्वरण के विद्युत बल के विरुद्ध एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है|


5. चूँकि किसी दिए गए आवेश विन्यास के कारण विद्युत क्षेत्र द्वारा परीक्षण आवेश पर किया गया कार्य पथ से स्वतंत्र
होता है, इसलिए विभवांतर भी किसी भी पथ के लिए ...........................होता है।


6. किसी बिंदु पर धनात्मक आवेश के कारण विभव धनात्मक होता है जबकि ऋणात्मक आवेश के कारण यह....................... होता है।


7. जब किसी धनात्मक आवेश को विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है, तो यह एक बल का अनुभव करता है जो इसे उच्च विभव
वाले बिंदुओं से निम्न विभव वाले बिंदुओं की ओर ले जाता है। दूसरी ओर, एक ऋणात्मक आवेश एक बल का अनुभव
करता है जो इसे ...............विभव से .....................विभव की ओर ले जाता है।


8. विद्युत द्विध्रुव के कारण लंबवत द्विभाजक पर वैद्युत विभव ............................होता है। 


9. वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर ..........................वैद्युत विभव होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है।
10. (i) रेखीय आवेश के कारण समविभव पृष्ठ का आकार ............... होता है। (ii) जबकि बिंदु आवेश के कारण यह ....................होता है।


समविभव पृष्ठ के गुण
11. (a) समविभव पृष्ठ एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करते क्योंकि यह प्रतिच्छेद बिंदु पर विद्युत क्षेत्र E की दो दिशाएँ देता
है जो ............................नहीं है।

(b) समविभव पृष्ठ प्रबल विद्युत क्षेत्र के क्षेत्र में ...............................दूरी पर होते हैं

(c) विद्युत क्षेत्र सदैव समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर ................................होता है तथा उच्च विभव वाले एक समविभव पृष्ठ से निम्न विभव
वाले समविभव पृष्ठ की ओर निर्देशित होता है।

(d) परीक्षण आवेश को समविभव पृष्ठ के एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य ......................होता है।
(e) विद्युत क्षेत्र की दिशा ................विभव से ...................विभव की ओर होती है, अर्थात विभव घटने की दिशा में।


12. विद्युत क्षेत्र उस दिशा में होता है जिस दिशा में विभव सबसे अधिक तेजी से ...................है।

कुछ अन्य तथ्य : 


13. विद्युत क्षेत्र का परिमाण, बिंदु पर समविभव पृष्ठ के अभिलंब प्रति इकाई विस्थापन में विभव के परिमाण में परिवर्तन द्वारा दिया जाता है।


14. स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा स्थिरवैद्युत बल के विरुद्ध किया गया कार्य, स्थितिज ऊर्जा के रूप में संग्रहित हो जाता है। इसे स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। 

15. विद्युत क्षेत्र में एक इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश को एक बंद पथ (closed लूप) पर गति कराने में किया गया कार्य शून्य होता है।
इस प्रकार, स्थिरवैद्युत बल संरक्षी प्रकृति के होते हैं।


16.एकसमान विद्युत क्षेत्र E में एक द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा निम्न प्रकार से दी जाती है: स्थितिज ऊर्जा = -p ECosØ


17. वह प्रक्रिया जिसमें किसी क्षेत्र को किसी विद्युत क्षेत्र से मुक्त (E= 0) बनाना शामिल होता है, इलेक्ट्रोस्टैटिक परिरक्षण  (electrostatic shielding)के रूप में जानी जाती है।

उत्तर : 

1.अनंत     2. स्थिति   3. संरक्षी 4. इकाई 5. समान   6. ऋणात्मक 7. निम्न, उच्च 8. शून्य 9. समान 10.बेलनाकार, गोलाकार    11a.संभव 11b निकट 11c  अभिलंबवत 11d शून्य 11e उच्च, निम्न 12. घटता  

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क्या अध्यात्म में पैसे कमाने की मनाही है?

ऐसा नहीं है, अध्यात्म न तो पैसा कमाने से रोकता है और न ही एक समृद्ध जीवन जीने से।

बल्कि अध्यात्म में तो इंसान एक समृद्ध और संतुलित जीवन के लिए पूरे प्रयत्न करता है।

अध्यात्म तो बस खुद पर नजर रखने को कहता है, होश में आने को कहता है।

अध्यात्म कहता है कि जितना जरूरी पैसा कमाना है उतना ही कमाएं और पैसे कमाने के लिए ऐसे रास्ते अपनाएं जिनसे विश्व व्यवस्था मे लोगों की आज़ादी बनी रहे, किसी का शोषण न हो और किसी के साथ छल न हो, लोग सच्चाई के प्रकाश मे रहें और उन्हे झूठ के अंधेरे मे न रखा जाए उन्हे उथली खुशी न बेंची जाए |

व्यक्ति की गरिमा और बंधुत्व बना रहे और साथ देश और व्यक्ति की स्वतन्त्रता भी |

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तकलीफ़ और समय

हर समय, हर काल में कोई न कोई दिक्कत या संघर्ष रहता है, लेकिन अगर वो कोई बहुत बड़ी दुर्घटना न हो तो समय का मलहम उसे भुला देता है और कालांतर मे रह जाती हैं केवल सुखद स्मृतियाँ |

गरिमा सुरक्षित रही तो भूतकाल परेशान नहीं करता,  अंत भला तो सब भला |

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विद्युत चुम्बकीय तरंगों से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1.विस्थापन धारा वह धारा है जो उस क्षेत्र में कार्य करती है जिसमें ........................... क्षेत्र समय के साथ बदल
रहे हैं।
2.  परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र ............................................... क्षेत्र का स्रोत है।


3. एक विद्युत चुम्बकीय तरंग एक त्वरित या दोलनशील आवेश द्वारा विकीर्ण की गई तरंग होती है
जिसमें परिवर्तनशील चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र का स्रोत होता है और परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत
होता है। इस प्रकार दो क्षेत्र एक दूसरे के स्रोत बन जाते हैं और तरंग दोनों क्षेत्रों के .................................. दिशा में प्रसारित होती है।


4. विद्युत चुम्बकीय तरंगें प्रकृति में अनुप्रस्थ होती हैं, अर्थात विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक दूसरे के ...................................होते हैं और
तरंग प्रसार की दिशा के ........................... होते हैं


5. विद्युत चुम्बकीय तरंगों में ऊर्जा,  औसतन विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के बीच .......................रूप से विभाजित होती है।


6. रेखीय संवेग, p= U/c, जहाँ U = विद्युत चुम्बकीय तरंगों द्वारा प्रेषित कुल ऊर्जा और c = ...................................।


7. विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम: आवृत्ति या तरंगदैर्घ्य के आरोही या अवरोही क्रम में विद्युत चुम्बकीय तरंगों के व्यवस्थित
अनुक्रमिक वितरण को विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। इसकी सीमा  γ-किरणों से लेकर ............................तरंगों तक होती है।


8. विद्युत चुम्बकीय तरंगों के उपयोग के बारे में प्राथमिक तथ्य


रेडियो तरंगें

(i) रेडियो और टीवी संचार में। (ii) खगोलीय क्षेत्र में।

माइक्रोवेव

(i) राडार संचार में। (ii) आणविक और परमाणु संरचना के विश्लेषण में। (iii) खाना पकाने के उद्देश्य से।

अवरक्त तरंगें

(i) आणविक संरचना जानने में। (ii) टीवीवीसीआर आदि के रिमोट कंट्रोल में।

 

पराबैंगनी किरणें

(i) बर्गलर अलार्म में प्रयुक्त। (ii) खनिजों में कीटाणुओं को मारने के लिए।

एक्स-रे

(i) चिकित्सा निदान में क्योंकि वे हड्डियों से नहीं बल्कि मांसपेशियों से होकर गुजरती हैं। (ii) धातु उत्पादों में दोष, दरारें आदि का पता लगाने में,

γ-किरणें।
(i) खाद्य संरक्षण के रूप में। (ii) रेडियोथेरेपी में।

उत्तर : 

1.विद्युत क्षेत्र      2.चुम्बकीय क्षेत्र   3. लंबवत    4.लंबवत, लंबवत   5. समान 6. विद्युत चुम्बकीय तरंग का वेग  7. रेडियो  

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प्रत्यावर्ती धारा से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1. प्रत्यावर्ती धारा (AC) यह वह धारा है जो परिमाण और .......................................... दोनों में बारी-बारी से और आवधिक रूप से बदलती
रहती है। I = I0 sin ωt या I = I0 cosωt जहाँ, I0 =  धारा का ........................ मान या अधिकतम मान है |


2. AC का प्रभावी मान या rms मान इसे एक पूर्ण चक्र में AC उस मान के रूप में परिभाषित किया जाता है जो किसी दिए
गए प्रतिरोधक में उतनी ही ऊष्मा उत्पन्न करेगा जितनी कि एक पूर्ण चक्र के दौरान समान प्रतिरोधक में और समान समय
में ............................................ धारा द्वारा उत्पन्न होती है।


3. धारा के शिखर मान का 70.7% AC का ...................................... मान होता है।


4. AC का औसत या माध्य मान AC के उस मान के रूप में परिभाषित किया जाता है जो अर्ध-चक्र में एक परिपथ में उतनी
ही मात्रा में आवेश भेजेगा जितनी कि समान समय में ............................. धारा द्वारा भेजा जाता है।


5. AC के शिखर मान का.....................................................% AC का औसत या माध्य मान देता है।  


6. प्रत्यावर्ती विद्युत वाहक बल या वोल्टेज वह विद्युत वाहक बल है जो परिमाण के साथ-साथ .............................. में भी वैकल्पिक और आवधिक रूप से
बदलता रहता है।


7. प्रेरणिक प्रतिक्रिया-  धारा के प्रवाह के लिए ...................................................की विरोधी प्रकृति को प्रेरणिक प्रतिक्रिया कहा जाता है।


8. धारिता प्रतिघात (Xc) प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह के प्रति ................................................. की विरोधी प्रकृति को धारिता प्रतिघात कहते हैं।


9. शक्ति- एक एसी परिपथ में, विद्युत वाहक बल और धारा दोनों समय के संबंध में लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए परिपथ में,
हमें पूर्ण चक्र (T) में ....................................... शक्ति की गणना करनी होती है।


10. शुद्ध प्रेरणिक और शुद्ध धारिता परिपथ में औसत शक्ति खपत ............................... के बराबर होती है क्योंकि ……………………….


11. एक एसी परिपथ में जब औसत शक्ति खपत .................................... होती है, तो धारा को वाटरहित धारा या निष्क्रिय
धारा कहा जाता है।


12. शक्ति गुणांक ……………….. है (प्रतीक )


13. प्रतिबाधा ……….. है (प्रतीक )


14. AC के एक पूर्ण चक्र में, AC का माध्य मान.................................. होगा।

उत्तर :

1. दिशा, शिखर     2. दिष्ट   3. rms  4.  दिष्ट     5. 63.7%  6. दिशा 7. प्रेरक (coil)  8. संधारित्र   9. औसत  10. शून्य, कालांतर शून्य   11. शून्य 

12. Cos ø   13. Z  14. शून्य 

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किसी के मार्फत मौखिक वादा करने पर जोखिम की संभावना

A के मौखिक अनुरोध पर आप A के मार्फत (on  behalf of A ) B से कोई वादा करते हैं तो कल को A के पीछे हट जाने पर आपकी बात खराब हो सकती है, आपकी छवि खराब हो सकती है B की नजरों में अतः इस जोखिम से बचने के लिए अगर संभव हो तो A और B की आपस में ही बात करा दो।

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प्रोत्साहन और स्नेह का एक बेहतरीन उदाहरण - स्व- प्रदीप जायसवाल

स्वर्गीय प्रदीप ताऊ जी ( पापा उन्हें पप्पू दादा कहते थे ) पापा की बुआ जी के बड़े बेटे थे |

पापा को वो बहुत स्नेह करते थे इसलिए हर होली उनका हमारे घर आना तय था, क्योंकि वो कभी पीलीभीत तो कभी बरेली पोस्टेड रहे तो त्यौहार में ही लखीमपुर आ पाते थे ( वह एक ग्रामीण बैंक में प्रबंधक थे ) त्यौहार और परिवार का क्या सम्बन्ध  होता है यह वो बखूबी जानते थे इसलिए त्यौहार के लिए वो लखीमपुर आते ही थे |


यहाँ उनके बारे में लिखने का कारण उनसे मिलने वाला प्रोत्साहन, स्नेह और रिकग्निशन है :

पापा, उम्र में बड़े और पढ़े लिखे लोगों को ख़ास  “अहमियत” देते थे, ये हमें ताऊजी के आने पर भी दिखता था इसिलए मेरी नज़र में भी ताऊ जी की एक अलग ही छवि थी, मेरा बालमन भी उनकी तरह ही पढ़ लिखकर मान-सम्मान  पाना चाहता था|


आप लोग इस बात को जरुर महसूस किये होंगे की जब कोई आपसे बड़ा जिसे आप भी बड़ा और खुद से बेहतर मानते हो वो आपकी तारीफ कर दे या आपके काम की तारीफ कर दे तो बहुत अच्छा महसूस होता है और आपका स्वयं पर विश्वास बढ़ जाता है और आप सोंचते हैं कि हाँ "मै सही तरीके से काम कर रहा हूँ और ऐसे ही काम करता रहा तो एक दिन जरूर बेहतर करूँगा " ऐसा ही कुछ उस वक़्त भी हुआ ;

मै उस वक़्त ग्यारहवीं में था और अपने साथियों में ज्यादातर की तरह मै भी आईआईटी से इंजीनियरिंग करने के सपने संजो रहा था, उस वक़्त जब मै ताऊ जी से मिला तो उन्होने उस वक़्त की IITs के बारे मे मुझसे बात की और मेरा उत्साह बढ़ाया कि मै एक साल तैयारी कर बेहतर के लिए प्रयास करूँ, उनका मेरी क्षमताओं मे विश्वास प्रकट करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी, इससे मेरा पढ़ाई मे और ज्यादा मन लग गया क्योंकि अब लग रहा था कि सेलेक्शन पक्का है | हालांकि बाद मे तैयारी के दौरान मैं अपनी समझ के उस गैप को न भर सका जो ग्यारहवीं-बारहवीं के अध्ययन के दौरान रह गया था क्योंकि मेरे लिए उस गैप को एक साल मे भर पाना आसान न था, लेकिन बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा मे मैंने अखिल भारतीय रैंक 46 हांसिल की और वहाँ से मैंने भौतिकी मे बीएससी ( आनर्स ) किया और आगे चलकर आईआईटी मे पढ़ने का सपना भी पूरा किया, जॉइंट एड्मिशन टेस्ट फॉर एमएससी (JAM) मे  अखिल भारतीय रैंक 75 हांसिल करके आईआईटी दिल्ली मे प्रवेश लेकर, उस वक़्त भी ताऊ जी का प्रोत्साहन मिला और पिता जी के देहांत के बाद उनकी तरफ से हर संभव मदद कि पेशकश भी, इससे  मुझे अपनेपन और अकेला न होने का एहसास मिला |


उन्होने मुझे कई बार अपने पास मिलने के लिए दिल्ली से लौटते वक़्त बरेली बुलाया लेकिन मै व्यस्तता कहिए या फिर अव्यवस्था के चलते उनसे मिल न सका, अगर मिल पाता तो उनके सानिध्य मे काफी कुछ सीख पाता क्योंकि वो अपनी व्यस्तता के बावजूद भी, जो भी उन्हे अप्रोच करता उन्हे समय देते और हर संभव मदद कर जरूरी और तर्कसंगत तथा व्यावहारिक सुझाव/सलाह देते थे |


सरकारी सेवा मे आने के बाद जब मैंने उन्हे बताया कि मुझे कोलकाता क्षेत्र मिला है तो उन्होने एक बात कही थी जो मुझे आज भी याद है और मै उसका अनुसरण करने का पूरा प्रयास भी करता हूँ, वो बात थी कि, “ कहीं भी जाओ वहाँ का जो उपेक्षित तबका है उसे अगर मौका दे सको उनकी अगर तकलीफ को संबोधित कर सको तो कभी अकेले न रहोगे ”

मै अपने सिक्किम टेन्योर के दौरान सोंचा करता था कि जल्द ताऊ जी से मिलने जाऊंगा लेकिन  उसी बीच कोविड की लहर ने ताऊ जी को हमसे छीन लिया, कल ताऊ जी की पुण्य तिथि थी, ताऊ जी का शरीर तो नहीं है हमारे बीच लेकिन वो अपनी बातों और एक खुशमिजाज़, उदार और मददगार व्यक्ति की मिसाल के तौर पर हमेशा हमारे बीच रहेगें, काश उनका सानिध्य पाकर मै कुछ और भी सीख पाता |


उनकी छोटी बहन, अंजना बुआ उन्हे याद करती हुयी कहती हैं कि वो उनका ऐसे ख्याल रखते थे जैसे एक जिम्मेदार पिता अपने बच्चों का ख्याल रखता है और छोटे भाई के प्रति जो उनका प्रेम था उसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उनके छोटे भाई सुनील चाचा, अपने बड़े भाई के असमय देहांत पर एक ही बात कहते हैं कि उनकी तो दुनिया ही उजड़ गयी |

कहते हैं न कि कहने से ज्यादा करने का प्रभाव पड़ता है वो मैंने ताऊ जी के घर भी देखा, अपने व्यवहार और जीवन से जो उन्होने छाप छोड़ी वो आज भी आदरणीय ताई जी, दीदी और भैया लोगों के आत्मीय व्यवहार मे दिखती है, ये देख अभी भी लगता है कि ताऊ जी हमारे बीच ही है|


स्वर्गीय ताऊ जी के बारे मे यहाँ लिखने का उद्देश्य उनकी बातों को और उस मिसाल को जिंदा रखना है जो मानवीय सदगुणो मे एक हीरे की तरह हैं जिसने भी ऐसे गुणो को खुद के व्यक्तित्व मे पिरोया वो हमेशा भीड़ से  अलग चमका |


उन्ही के प्रयासों के संदर्भ मे एक शेर याद आता है :

माना कि इस जमीं को न गुलज़ार कर सके 

कुछ खार कम तो कर गए गुजरे जिधर से हम                                                "   खार = काँटा "

  • साहिर लुधियानवी

विनम्र श्रद्धांजलि

  • लवकुश कुमार
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बच्चों के लिए कुछ नाम जो उत्कृष्ट जीवन का उदाहरण हैं -1

बच्चों को अगर सही समय पर सही आदर्श मिल जाएँ 

या कहें तो उनके सामने ऐसे कई नाम हों जिन्होंने अपने काम के दम, और अपने काम की उत्कृष्टता और सार्थकता के चलते नाम कमाया हो या उत्कृष्ट जीवन जिया हो तो हम उन्हे सतही जीवन जीने से बचा सकते हैं |

उपरोक्त के दृष्टिगत कुछ नाम नीचे साझा किए जा रहे हैं :

क्रम संख्या  नाम क्षेत्र कार्य  टिप्पणी
1 डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम   वैज्ञानिक और भारत के राष्ट्रपति 

भारत के मिसाइल मैन, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक,

बच्चों के लिए उत्कृष्ट और प्रेरणादायक साहित्य सृजित किया |, धन अर्जन के बजाय लोक सेवा और समाज सेवा को प्राथमिकता दे एक बेहतरीन उदाहरण बने |

कार्य स्थल को मंदिर समझते थे 

बचपन से विनम्र पृष्ठभूमि के बावजूद अपनी मेहनत और लगन के दम पर नामचीन वैज्ञानिक और भारत के राष्ट्रपति बने तथा इनकी सेवाओं के लिए इन्हें भारत रत्न दिया गया| 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त भी प्राप्त हुयी |
2 एडमंड हिलेरी  पर्वतारोही (Mounatineer) First person alongwith Tenzing norgey to climb Mount Everest, the highest mountain peak in the world बर्फ से ढकी हुये पहाड़ पर पैदल यात्रा, जहां कोई रास्ते भी नहीं हैं 
3 एलटन जॉन musician Started learning piano at the age of just 4 years इतनी छोटी उम्र मे तो बच्चे बस खेल मे लगे रहते हैं, खेल भी जरूरी है साथ ही  किसी क्षेत्र मे उत्कृष्टता के लिए अभ्यास बहुत जरूरी है |

 

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