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अब तो वायु हो चली गर्म
कुछ तो करो शर्म
पर्यावरण पर हो जाओ नर्म ।
संरक्षित करना है आपका धर्म ।।
एसी से गर्मी से बच जाओगे
न पालो ऐसा भ्रम
सीएफसी होता है विषैला
जानो ओजोन का मर्म
पेड़ लगाने का करो कर्म
ईंधन का प्रयोग करो कम
जनसंख्या वृद्धि जो जाए थम
टिकाऊ विकास की ओर जो बढ जाए हम
अब तो वायु हो चली गर्म
कुछ तो करो शर्म
-डॉ अनिल वर्मा
लेखक कृषि रसायन में परास्नातक हैं और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर उत्तराखंड में कृषि रसायन पर शोध कार्य कर चुके हैं।
ये लेखक के निजी विचार हैं और समाज की बेहतरी के प्रयोजन से लिखे गए हैं।
सामूहिक प्रयास ज्यादा कारगर होता है और किसी भी तरह के विरोध का सामना करने में ज्यादा सक्षम अतः बड़े बदलाव के लिए संगठन ज्यादा कारगर हो सकता है। सबसे पहले हमें अपने विचार रखने होंगे मुखरता के साथ ताकि हमारी पहचान स्पष्ट रहे और उसके आधार पर समान विचारधारा के लोग जुड़ सकें। संगठन के लिए अपनत्व की भावना या साझा हितों का होना जरूरी है। एक दूसरे के लिए काम करके अपनत्व की भावना जगायी जा सकती है। अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करके, उसे साझा कर एक मिसाल पेश कर लोगों का विश्वास जीता जा सकता है। जो कुछ सीखा और जैसा समाज आप चाहते हैं उसे खुलकर अपना समर्थन देकर हम समान विचारधारा वाले लोगों को संगठित कर सकते हैं।
- लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और वर्तमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग में अराजपत्रित अधिकारी हैं। ये लेखक के निजी विचार हैं और समाज की बेहतरी के प्रयोजन से लिखे गए हैं।